आखिर अब तक क्यों सजा नहीं मिल पाया पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड के अपराधियों को?

भूपेन्द्र सिन्हा छुरा

छुरा – घटना के आज बारह साल बाद भी पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड के अपराधियों को सजा नहीं मिल पाना ये बड़ा सवाल है। बता दें कि पत्रकार उमेश राजपूत को 23 जनवरी 2011 को छुरा नगर के आमापारा स्थित उनके निवास पर शाम लगभग 6.30बजे अज्ञात अपराधियों के द्वारा पांच लोगों की उपस्थिति में दिनदहाड़े गोलीमार हत्या कर दी गई थी।  स्थानीय पुलिस के लगभग चार वर्ष की जांच में अंत में कुछ संदेहियों का अहमदाबाद में ब्रेन मेपिंग टेस्ट कराया गया जिसमें रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया था कि कुछ प्रभाव शाली लोगों के द्वारा उनकी सुपाड़ी देकर उमेश राजपूत की हत्या कराई गई और ये बात भी रिपोर्ट में सामने आया कि एक संदेही उस मिटिंग में उपस्थित था जहां पत्रकार उमेश राजपूत की हत्या की प्लानिंग बनी और पूर्व विधायक के दोनों पुत्रों के आदमियों के द्वारा उनकी हत्या कराई गई। जब कुछ राजनीतिक दल के नेताओं का नाम सामने आया तो पुलिस की आगे की जांच भी शांत पड़ने लगी।

   वहीं घटना के लगभग चार वर्ष बाद परिजनों की मांग पर उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई की टीम जांच हेतु छुरा नगर पहुंची और जांच शुरू हुई जिसमें सैकड़ों लोगों से पुछ ताछ की गई और घटना के समय उपस्थित एक पत्रकार को आरोपी बनाया गया। लेकिन सीबीआई की मानें तो उनकी हिरासत में ही उन्होंने आत्महत्या कर ली। और आज इतने वर्षों बाद भी इस हत्याकांड में किसी आरोपी को सजा दिलाने में सीबीआई भी अब तक असफल रही।

किंतु परिजनों की मानें तो पांच लोगों की उनके घर में उपस्थित रहते हुए दिनदहाड़े हत्या की घटना होना और उपस्थित किसी भी व्यक्ति के द्वारा कुछ मालूम नहीं कहने की बात कहना अजीबो-गरीब लगता है। वहीं दुसरा पहलु ये है कि हत्याकांड की जगह पर धमकी भरे पत्र,जिस कपड़े के पर्दे पर फायरिंग हुई थी वह पर्दे, मोबाइल और कंप्यूटर का थाने से गायब होना बहुत बड़ी साज़िश की शंका को दर्शाता है। बावजूद इसके 10 वर्ष बाद भी किसी अपराधी को सजा नहीं मिल पाना एक गंभीर और सोचनीय विषय प्रतीत होता है।

आखिर सवाल यह उठता है कि थाने के मालखाने से ये सामान कैसे गायब हुए इसके जिम्मेदार कौन है? घटना स्थल पर पांच लोगों की उपस्थिति में कोई क्यों कुछ नहीं देख पाया? पुलिस की जांच में आखिर ब्रेन मेपिंग टेस्ट को आधार सीबीआई ने क्यों आगे नहीं बढ़ाया और अलग तरीके से जांच रिपोर्ट तैयार करने के बाद भी अपराधियों को अब तक सजा क्यों नहीं हो पाई? क्या कुछ राजनीतिक दल के नेताओं के नाम सामने आने से जांच की गति धीमी हुई? और उच्च न्यायालय के आदेश के दस वर्ष बाद भी क्यों अब तक जांच एजेंसियां उच्च न्यायालय में जांच रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई? इन सभी पहलुओं के जवाब के इंतजार में आज भी उनके परिजन इंतजारत है कि आखिर इन पहलुओं का सही जवाब कब मिल पायेगा और आखिर पत्रकार उमेश राजपूत के हत्यारों को कब तक सजा मिल पायेगा?