होली की अनंतानंत शुभकामनाएं

आया फागुन मास सुहावन, स्वागत गीत सुनाओ रे।

कभी नहीं उतरे जो चढ़कर, रंग वही ले आओ रे।।

फूलों सा मन खिल-खिल जाए, टेसू वाली होली से।
दुश्मन का भी जीत हृदय लो, मोहक हँसी ठिठोली से।
झूम नगाड़ों की थापों पर, राग फगुनवा गाओ रे।
कभी नहीं उतरे जो चढ़कर, रंग वही ले आओ रे।।

प्रेम रंग में रँगो जरा सा, गोरे-गोरे गालों को।
हो जाने दो मस्त पवन सा, बहकी-बहकी चालों को।
करो शरारत स्नेहिल मितवा, मिल हुड़दंग मचाओ रे।
कभी नहीं उतरे जो चढ़कर, रंग वही ले आओ रे।।

गले लगाओ दीन-दुखी को, ज्यों मधुरस की गोली हो।
बहे रंग की निर्मल धारा, मर्यादित ही होली हो।
भरे हृदय का रिक्त कलश वो, रंग पलाशी लाओ रे।
कभी नहीं उतरे जो चढ़कर, रंग वही ले आओ रे।।

डॉ. इन्द्राणी साहू”साँची”
भाटापारा (छत्तीसगढ़)
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