सुरेन्द्र मिनोचा
मनेन्द्रगढ़ :- आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाई गई।इस अवसर पर रतन केशरवानी,विजय पाठक,युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष आदित्य अग्रवाल,अमित चंदेल,प्रखर जायसवाल, विवेक शर्मा,किशन बुनकर,राहुल केशरवानी, मनोज खटिक, स्मिता तिवारी एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।सर्वप्रथम उपस्थित जनों ने स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण किया। अपने उद्बोधन में सामाजिक कार्यकर्त्ता रतन केशरवानी ने कहा कि आज उस महान शख्सियत की जयंती को भी मनाने का दिन है जिन्होंने दुनियाभर में भारतीय संस्कृति-विचारों का डंका बजाया था। 12 जनवरी, 1863 को बंगाल में जन्मे स्वामी विवेकानंद धर्म, कला, दर्शन, साहित्य में कुशल थे।शिकागो में आयोजित धर्म संसद में जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो वहां मौजूद लोग हतप्रभ रह गए।विजय पाठक ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि स्वामी जी ने भारतीय संस्कृति और विरासत की ऐसी प्रस्तुति दी जो इतिहास में हमेशा के लिए अंकित हो गई, सदियां बीत जाने के बाद आज भी विश्वभर में इसकी चर्चा की जाती है।
शिकागो में आयोजित धर्म संसद में भारत के आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद को बोलने का अवसर दिया गया,यह उस वक्त किसी भारतीय के लिए बड़ी उपलब्धि थी। 11 सितंबर 1893 को जब स्वामी जी मंच पर पहुंचे और अपना संबोधन शुरू किया, तो वहां मौजूद लोग भारत की अनमोल संस्कृति के मुरीद हो गए।युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष आदित्य अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका में स्वामी जी ने अपने भाषण की शुरुआत लोगों को हिंदी में संबोधित करते हुए की। संबोधन की शुरुआत करते हुए जैसे ही उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के भाइयों और बहनों’ उनकी वाणी की ऊर्जा ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वामी विवेकानंद ने कहा-अमेरिका में मेरे भाइयों और बहनों मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के सताए लोगों को शरण में रखा है। मैं आपको अपने देश की प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से भी धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं। मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है।अन्य वक्ताओं ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे।
राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई गई स्वामी विवेकानंद जी की जयंती।
