
प्रमोद दुबे
महासमुंद :- लोगों को मछली बांटने की बजाए मछली पकड़ना सिखाए तो ज्यादा अच्छा होगा। इससे लोग आत्मनिर्भर बन सकेंगे। राज नेताओं, ऐसी वायदों या योजनाओं का समावेश नहीं करना चाहिए जिस देश की अर्थव्यवस्था एवं उत्पादन प्रभावित हो। उक्त बातें किसान नेता रमनलाल चंद्राकार ने कहीं है। उन्होंने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहां है कि सत्ता पाने और यहां सत्ता बढ़ाने की राजनीति लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है। आज राजनीति इसी राह पर चल पड़ी हैं। लोकतंत्र का प्राणवायु है चुनाव, लेकिन यह दुषित हो चला है ऐसे में लोकतंत्र कैसे जीवित रहेगा। मुफ्त की रेवाड़ी योजना व्यवसायिक तथा जातिवाद एवं धनबल की राजनीति से लोकतंत्र दुषित हुआ है और लोकतंत्र पर संभीर संकट पैदा हो सकता है।इस सोचनीय व गंभीर विषय पर सभी राजनेताओं, जनप्रतिनिधियों और मतदाताओं को चिंतन ममन और समझना होगा कि सरकार लोगों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती हैं, लेकिन लालसाओं को नहीं। लालसाओं की पूर्ति में सरकार लग गया तो विकास में बाधा तो होगी ही। आज ऐसा ही हो रहा है।
