अजय चंद्राकर का फिर हो रहा है अल्लाह भारी कांग्रेस में सामंजस्य की कमी।

कुरूद :- कुरूद विधानसभा में एक बार फिर से राजनीतिक सरगामी तेज हो गई है कांग्रेस में कई कार्यकर्ता नाराज तो कई नए कार्यकर्ता काम कर रहे हैं ऐसे में राजनीतिक चाणक्य कहे जाने वाले प्रदेश व क्षेत्र के तेजतर्रार अनुभवशील नेता अजय चंद्राकर की रणनीति शुरू होती है वह एक पिक्चर का डायलॉग है जिसमें अमिताभ बच्चन कहते हैं कि हम जहां खड़ा होते हैं वहीं से लाइन शुरू होती है। पूर्व मंत्री प्रदेश प्रवक्ता पार्टी में अनेक पद पर एवं विधायक रह चुके अजय चंद्राकर सरकार किसी का भी रहे क्षेत्र में काम करवाने की ताकत रखते है संविधान नियम कानून की ज्ञान प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था इन सब की जानकारी होना राजनीतिक जीवन में आवश्यक होता है। लेकिन कई प्रत्याशी जोश खरोस में आपा खो बैठते हैं जिनका नतीजा विधानसभा चुनाव के रिजल्ट में देखने को मिलता है। लेकिन पिछले कई वर्षों से क्षेत्र के विधायक अजय चंद्राकर का अपने कार्यकर्ता एवं जनता के प्रति 24 घंटा सक्रियता यह दर्शाता है की एक जनसेवक सिर्फ चुनाव आने पर ही नहीं अपितु हर स्थिति में वह अपने समर्थकों कार्यकर्ताओं एवं आम जनता के साथ हमेशा उनके दुख सुख में तैयार रहे। कुरूद कांग्रेस में बहुत सारे नेता जिनके पास वोट बैंक है वह नेता विधानसभा चुनाव में काम नहीं कर रहे हैं ऐसे में उनके साथ जुड़े कार्यकर्ता भी किनारे होकर चुप बैठ गए हैं, जबकि कुरूद में भाजपा की पकड़ जमीनी स्तर बुथ पर बन चुकी है भाजपा का वोट फिक्स माना जाता है क्योंकि इस क्षेत्र में कहे जाते है जहां पक्की सड़कें जिस गांव में सीसी रोड रंगमंच सामुदायिक भवन मूलभूत चीज नहीं थी वह अजय चंद्राकर ने प्रदेश के हर कार्यों को अपने क्षेत्र में करवाया है इसलिए वे आम जनता के मसीहा माने जाते हैं और वह हमेशा के लिए लोगों के दिल में जननायक के रूप में बन गए हैं। लेकिन कांग्रेस में आपसी मतभेद के चलते। मुझे नहीं मिला तो मैं तुझे भी जितने नहीं दूंगा। मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं मेरे हिसाब से चले, यह सब बातें विधानसभा कुरूद में देखने व सुनने को मिलती है जिनके परिणाम निराशाजनक रहता है किसी भी पार्टी की कार्यक्रम सभा रैली की भीड़ यह नही दर्शाते की उनके वोटर है वह एक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भीड़ की व्यवस्था करना पड़ता है आज दोनों पार्टी किसान के फैसले के ऊपर टिकी हुई है किसानों के लिए समर्थन मूल्य भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं कांग्रेस 3200 सौ रुपया 20 क्विंटल धान = 64000 होता है वह भी किस्तों में पेमेंट और भाजपा 3100 रुपया 21 क्विंटल धान = 65100 रुपया वह भी एक एकमुश्त देने की बात कही है, मतलब हर 20 क्विंटल में भाजपा की तरफ से ₹1100 ज्यादा मिल रही है ऐसे में प्रदेश की चुनाव की स्थिति कुछ भी हो सकती है।