बसना विधानसभा क्षेत्र के लिए दोनों प्रमुख दर भाजपा एवं कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होना तय है।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद :- भाजपा के क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी संपत अग्रवाल को मैदान में उतारा है, वे पहली बार भाजपा की टिकट पर बसना विधानसभा के प्रत्याशी बने हैं। इसके पहले 2018 के विधानसभा चुनाव में वे निर्दलीय प्रत्याशी थे और उन्होंने 50,000 से अधिक मत बटोर कर दोनों प्रमुख दलों में हड़कंप मचा दिया था। इस चुनाव में भाजपा द्वारा डीसी पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया था, वे तीसरे स्थान पर रहे। वहीं कांग्रेस ने एक बार फिर सरायपाली राज परिवार के विधायक देवेंद्र बहादुर सिंह पर दाग लगाया है। कांग्रेस से 2018 के चुनाव में जीत कर विधायक बने देवेंद्र बहादुर सिंह 2013 में भाजपा प्रत्याशी रूप कुमारी चौधरी से चुनाव हार गए थे। उसके बाद 2018 चुनाव में वे पुनः विधायक बन गए। उनकी लोकप्रियता देखकर कांग्रेस ने इस बार पुनः उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। 9 बार प्रतिनिधित्व किया राजपरिवार ने मात्र बसना विधानसभा से ही सरायपाली राजमहल ने अब तक कुल नौ बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। इसमें एक बार निर्दलीय मिलाकर छह बार महेंद्र बहादुर सिंह ने प्रतिनिधित्व किया। एक बार वीरेंद्र बहादुर सिंह एवं दो बार देवेंद्र बहादुर सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि क्षेत्र की जनता का झुकाव हमेशा ही सरायपाली राजपरिवार की ओर रहा है। सन 1990 के विधानसभा चुनाव में पहली बार राजपरिवार का तिलिस्म टूटा था और जनता दल प्रत्याशी लक्ष्मण जयदेव सत्पथी राज परिवार के महेंद्र बहादुर सिंह को हराकर विधायक बने थे। इसके बाद 2003 के चुनाव में डॉक्टर त्रिविक्रम भोई ने राज परिवार को पीछे कर विधायक बने थे। इसके बाद सीधा 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेत्री रूप कुमारी चौधरी बसना विधानसभा जीत कर विधायक बनी थी, परंतु 2018 की लहर में एक बार पुनः देवेंद्र बहादुर सिंह जीत गए। वर्तमान में वे विधायक है। इन पर लगातार निष्क्रियता का आरोप होने के बावजूद क्षेत्र में महल की लोकप्रियता भुनाने कांग्रेस ने पुनः उन्हें टिकट दे दी है। वहीं दूसरी और कोई दशक भर से लगातार विधानसभा क्षेत्र में नीलांचल सेवा समिति के नाम से सेवा कार्य करते हुए हजारों लोगों को निःशुल्क चिकित्सा एवं शिक्षा सहित खेल क्षेत्र में कार्य कर लोकप्रिय हुए संपत अग्रवाल भाजपा की टिकट पर चुनाव मैदान में है। अब देखना होगा कि सरायपाली महल और नीलांचल सेवा के बीच हो रहे इस मुकाबले में जनता किस पर ज्यादा भरोसा करती है।