विधानसभा में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों ने अब तक राजनीतिक इतिहास में महिलाओं पर भरोसा नहीं जताया।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद :- कांग्रेस हो या बीजेपी या फिर अन्य राष्ट्रीय दल किसी ने भी महासमुंद विधानसभा सीट पर महिला उम्मीदवार नहीं उतारा। ऐसा नहीं है कि राष्ट्रीय दलों में महिला दावेदारों की कमी रही। महिलाओं ने दोनों दलों में हर बार टिकट की दावेदारी की है बावजूद इसके राष्ट्रीय दलों के उच्च शीर्ष नेतृत्व ने उनकी उपेक्षा की है विधानसभा में महिला मतदाताओं की स्थिति देखें तो पुरुष मतदाताओं से कहीं अधिक है अविभाजित मध्य प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य बनने तक दोनों दलों से महासमुंद विधानसभा सीट पर महिलाओं को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला है। जिले में चार विधानसभा सीट है जिसमें 2013 में बसना विधानसभा सीट से भाजपा ने रूप कुमारी चौधरी और 2018 में हुए चुनाव में खल्लारी विधानसभा सीट से मोनिका साहू को प्रत्याशी बनाया था। इससे पहले 2013 में सरायपाली सीट से भाजपा ने नीरा चौहान को उम्मीदवार बनाया था। वही इस बार के चुनाव में सरायपाली से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सरला कोसरिया और खल्लारी सीट से सदस्य अलका चंद्राकर को बतौर महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा है वही महासमुंद और बसना विधानसभा सीट में संपत अग्रवाल और महासमुंद सीट में राजू योगेश्वर सिंहा को मौका दिया गया है। कांग्रेस की ओर से खल्लारी और बसना विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक द्वारकाधीश और देवेंद्र बहादुर को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। सरायपाली और महासमुंद विधानसभा सीट पर प्रत्याशियों की घोषणा होना शेष है। महासमुंद से महिला प्रत्याशियों के रूप में कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉक्टर रश्मि चंद्राकर, नगर पालिका अध्यक्ष राशि महिलांग और लक्ष्मी देवांगन और अन्य ने दावेदारी पेश की है। वही सरायपाली की बात कर तो चतुरी नंद, गीता रतन बंजारे और चंद्रकांता चौहान आदि ने दावेदारी पेश की है। इन सीटों पर प्रत्याशी तय करने को लेकर कांग्रेस आलाकमान में मंथन जारी है। यहां यह बताना भी लाजमी है कि दोनों ही सीटों पर मौजूदा विधायक भी टिकट के प्रबल दावेदार है। अब देखना होगा कि कांग्रेस आलाकमान किसके नाम पर मुहर लगती है।
33% आरक्षण की घोषणा के बाद उत्साह
पुरुष के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली महिलाओं के लिए हमेशा से आरक्षण की बात होती रही है। पिछले कुछ वर्षों में हर जगह में महिलाओं को पुरुषों की तरह मौका भी मिला है। लेकिन आरक्षण के हिसाब से यह आंकड़ा बहुत कम है गत दिनों राज्यसभा और लोकसभा में 33% महिला आरक्षण बिल पेश हुआ और वह सर्व संपत्ति से पारित भी हो गया। हालांकि इस चुनाव में यह लागू नहीं हुआ है पर प्रस्ताव के बाद से महिलाओं में खुशी का माहौल है। खासकर राजनीतिक क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं में यह उत्साह दो गुना है महिला नेत्री भी यह मानकर चल रही है कि राजनीति में उनका भी कद बढ़ेगा और उन्हें भी अधिक मौका मिलेगा। महिलाएं यह आस भी लगाए बैठी हुई है कि वर्तमान में हो रहे विधानसभा और आगामी दिनों में होने वाले लोकसभा चुनाव में उनको मौका मिलेगा। विधानसभा चुनाव में है भाजपा के साथ कांग्रेस ने महिलाओं को मौका भी दे दिया है। जिले से दावेदारी करने वाली कांग्रेस नेत्रियों में आस है कि महासमुंद वा सरायपाली सीट पर कांग्रेस महिलाओं को मौका देगी।