
प्रमोद दुबे
महासमुंद :- आचार संहिता लागू होने के दिन भाजपा ने अपनी शेष अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। इनमें महासमुंद से योगेश्वर राजू सिंहा तथा बसना से संपत अग्रवाल शामिल है। इसके पूर्व पहली सूची में पार्टी ने 17 अगस्त को खल्लारी से अलका चंद्राकर और सरायपाली से सरला कोसरिया को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था ।उधर कांग्रेस ने एक भी सीट पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। महासमुंद तथा बसना में भाजपा प्रत्याशी क्रमशः योगेश्वर राजू सिंहा तथा संपत अग्रवाल का नाम घोषित होते ही वहां उनके समर्थकों और भाजपा जनों ने चौक चौराहों पर पटाखे फोड़कर मिठाई बांटी। नगर आगमन पर पुष्प वर्षा कर बाजे गाजे के साथ सिंहा का कार्यालय स्वागत सभा का आयोजन किया गया ।बसना में भी जगह-जगह कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया। पहली सूची में खल्लारी और सरायपाली के प्रत्याशी घोषित होने के बाद दूसरी सूची घोषित होने की लोग बेसबरी से इंतजार कर रहे थे ।लेकिन पार्टी ने पहली सूची की घोषणा के करीब 54 दिनों बाद बसना व महासमुंद के अधिकृत प्रत्याशी की घोषणा आचार संहिता लागू के दिन की यानी घोषित दोनों प्रत्याशियों को प्रचार व अन्य कार्यों के लिए मात्र 38 दिन का समय मिलेगा। जबकि पूर्व में घोषित सरायपाली और खल्लारी के प्रत्याशी के 91 दिन का समय प्रचार के लिए मिला। इन प्रत्याशियों ने 54 दिनों में लगभग आधे गांवों तक अपना प्रचार कर लिया है ।चारों अधिकृत प्रत्याशियों के नाम घोषित कर भाजपा टिकट वितरण में आगे निकल चुकी है । जबकि कांग्रेस अभी तक टिकट चमन को लेकर असमंजस की स्थिति में दिखती है ।हालांकि वर्तमान विद्यायक को टिकट मिलने की संभावनाएं जरूर देखी जा रही है। लेकिन अधिकृत सूची जारी होने के बाद ही पुष्टि हो सकेगी। भाजपा ने इस बार फूक फूक कर चयन करते हुए नए शहरों पर दाव खेला है ।महासमुंद प्रत्याशी योगेश्वर राजू सिंहा पार्टी के जिला उपाध्यक्ष है ।तथा संगठन में सकरी भूमिका निभाते रहे हैं। पहली बार भाजपा ने बीते दो दशकों में महासमुंद में कुर्मी और साहू कार्ड न खेल कर नया प्रयोग किया है । खल्लारी से कार्ड खेलकर श्रीमती अलका चंद्राकर को टिकट देने के बाद ही यह समझ आने लगा था। कि महासमुंद का टिकट इस बार गैर कुर्मी को जा सकता है। उधर बसना में पार्टी ने जातिगत समीकरणों से परे जाकर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष संपत अग्रवाल को टिकट दिया है। श्री अग्रवाल नीलांचल सेवा समिति के संस्थापक है। 2018 के चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। और 50027 वोट पाकर भाजपा प्रत्याशी को मुझे छोड़ा था। वहां से कांग्रेस जीती थी।
