धमतरी :- मछुआरा समाज ने अजजा वर्ग में पुन: बहाली की मांग को लेकर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। इसके तहत 5 अक्टूबर को गांधी मैदान धमतरी में वृहद रूप में धरना देकर प्रदर्शन किया। इसमें धीवर, निषाद, केंवट, कहार, मल्लाह, भोई आदि शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि मछुआरा मांझी समुदाय के तहत आने वाले धीवर, निषाद, केंवट, कहार, मल्लाह, भोई आदि समानार्थी जनजातियों को वर्ष 1950 तक अनुसूचित जनजाति वर्ग में रखा गया था। शासन के राजपत्रों में प्रमाणित है। लेकिन 1950 के बाद षडय़ंत्रपूर्वक मछुआरा समुदाय के समस्त जनजातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में डाल कर उन्हें आरक्षण से वंचित कर दिया गया। इसकी पुन: बहाली की मांग को लेकर बीते 75 सालों से मछुआरा समुदाय संघर्षरत है। कांग्रेस-भाजपा राजनीतिक दलों ने बार- बार मछुआरा समाज को झूठा आश्वासन देकर समाज का वोट लिया। सत्ता में आने के बाद उन्हें भूला दिया गया। इससे छत्तीसगढ़ प्रदेश के 35 लाख मछुआरा समाज में बेहद आक्रोश व्याप्त है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए मछुआरा नेता परमेश्वर फुटान, नेहरू राम निषाद, होरीलाल मत्स्यपाल, नर्मदा जगबेहड़ा, सोहन धीवर, भोलाराम निषाद, कृष्णा हिरवानी, नारायण निषाद, भुवन लाल धीवर, चंदूलाल निषाद, संगीता निषाद, पंचराम धीवर, मोहित तारक, सुरेश निषाद, राम निषाद, अनिल निषाद, यशवंत कोसरिया, दिलीप धरमगुड़ी, भगवानदीन मछेन्द्र, सोनू नाग, संध्या हिरवानी, सावित्री सपहा, शीला धीवर, धृति हिरवानी, सुनील निषाद, चिरंजीवी हिरवानी, जिला मीडिया पवन निषाद समेत बड़ी संख्या में समाजजन जुटे हुए थे।

यह हैं मछुआरों की मांगे
नई मछुआ नीति में ठेकेदारी प्रथा को बंद कर वापस मछुआरा समितियों को लीज पर दिया जाए, दोहरा आडिट के नियम को समाप्त किया जाए, जलक्षेत्रों को जन्मजात मछुआरा समुदायों के लिए आरक्षित करने की मांग, भूमिहीन मत्स्य पालकों को तालाब खनन के लए भूमि नि:शुल्क उपलब्ध कराने, नीट-मात्स्यिकी कालेजों, इंजीनियरिंग, जेई एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मछुआरा समाज को आबादी के अनुुपात में सीट आरक्षित करने की मांग शामिल है।
