
एक जवान के कलम से
सैनिक होना इतना आसान नहीं प्यारे
कई कई संघर्षों से गुजरना पड़ता है
सेलेक्शन के लिए दिन रात एक करना पड़ता है
कड़ी मेहनत लगन और कठोर परिश्रम करना पड़ता है
घर द्वार सगे संबंधी मित्रों को भी छोड़ना पड़ता है
देश की सेवा के लिए त्याग तप् करना पड़ता है
ना कोई उठाये मेरे देश की ओर आँखे
ना लग जाये किसी की बुरी नज़र
इसलिए सरहद पर लड़ना पड़ता है
बिना जान की परवाह किये दुश्मनों से लड़ना पड़ता है
लड़ते लड़ते हो जाऊँ गर शहीद प्यारे
तो ना बहाना अपना आंसु
देशभक्त हूँ वतन के लिए तो इतना करना पड़ता है ।
लेमेंद्र साहू(अनुराग)
परसदा (मोखा)
गुंडरदेही बालोद (छ.ग. )
