छत्तीसगढ़ की सबसे महंगी सब्जी ‘बोड़ा’, जिसे कहते है काला सोना…जो है बीमारियों के लिए रामबाण …

धमतरी :-  सरई बोड़ा में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और खनिज तत्व पाये जाते हैं, जो कि इसे बनाते हैं.

बस्तर के सरई बोड़ा के बारे में आपने बहुत सुना होगा, छत्तीसगढ़ के ज्यादातर लोग इसका स्वाद भी ले चुके होंगे। साल को छत्तीसगढ़ में सरई कहा जाता है। जबकि बोड़ा स्थानीय आदिवासियों का दिया हुआ नाम है। इसलिए बोड़ा को सरई बोड़ा भी कहा जाता है। बोड़ा की खोज भी आदिवासियों की ही है। वनोपज पर निर्भरता के कारण वनवासी यहां पैदा होने वाले हर खाद्य पदार्थ के बारे में जानते हैं। बोड़ा भी उन्ही में से एक है।

बोड़ा दरअसल एक फंगस है। वैज्ञानिकों ने इसका बॉटिनिकल नाम शोरिया रोबुस्टा रखा है। वैसे इसे छत्तीसगढ़ का काला सोना भी कहा जाता है। राजधानी रायपुर में भी इसकी भारी डिमांड है। साल में महज डेढ़ दो महीने मिलने वाली यह सब्जी अब जंगलों में पैदा होने लगी है। गावों में ये 300 रुपये किलो, तो आसपास के शहरों में करीब 600 रुपये में मिलती है। जबकि महानगरों में यही सब्जी 2 हजार किलो तक बिकती है। आखिर क्या है यह सब्जी और कहां व कैसे पैदा होती है।
बोड़ा में हैं ये गुणकारी तत्व :- यह फंगस खाद्य के तौर पर उपयोग में लाया जाता है। सैल्यूलोज व कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होने की वजह से शुगर व हाई ब्लड प्रेशर  वालों के लिए यह रामबाण है। इसे खाने से उन्हें कोई नुकसान नहीं होता। आमतौर पर यह बटन मशरूम की तरह दिखता है।

मशरूम जहां जमीन के ऊपर होता है वहीं यह आलू की तरह जमीन के नीचे पैदा होता है। पेट की समस्याओं के लिए होड़ोपैथी में रुगड़ा से दवाई बनाई जाती है। प्रोटीन का यह बड़ा स्रोत है। फाइबर भी इसमें खूब होता है। कैलोरी काफी कम होती है, जिससे हेल्थ कॉन्श लोग आराम से इसे खा सकते हैं।