मंत्री शिव डहरिया ने झखमार के सुरता का किया विमोचन ।।

मंत्री शिव डहरिया ने झखमार के सुरता का किया विमोचन ।।

राजिम 26 मार्च। छत्तीसगढ़ के पुरोधा कवि उधोराम झखमार द्वारा रचित काव्य को संकलित कर हिंदी साहित्य भारती के जिलाध्यक्ष मुन्नालाल देवदास ने हिंदी साहित्य भारती के बैनर तले झखमार के सुरता का प्रकाशन करवाया गया तथा गत दिनों राजधानी रायपुर में आयोजित प्रांतीय छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के वार्षिक अधिवेशन एवं सम्मान समारोह में विमोचन करवाया गया। प्रमुख रूप से उपस्थित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री शिवकुमार डहरिया, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ केसरीलाल वर्मा, विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ विनय कुमार पाठक, गुरु घासीदास साहित्य संस्कृति अकादमी रायपुर के अध्यक्ष केपी खांडे, प्रांत अध्यक्ष डॉ जेआर सोनी, वरिष्ठ साहित्यकार परदेशी राम वर्मा ने अपने कर कमलों से झखमार के सुरता का विमोचन किया। इस मौके पर प्रदेशभर से पहुंचे करीब 200 साहित्यकार उपस्थित थे जिन्होंने इस काव्य संग्रह की भूरी भूरी प्रशंसा की। उल्लेखनीय है कि इस संग्रह में उनकी अनेक चर्चित कविता कहानी मौजूद है जो आज भी जनमानस में आत्मविश्वास जगाने का काम कर रहे हैं उनकी कविताएं व्यंग्य पर भी लिखी गई है। ज्ञातव्य हो कि झखमार कवि का जन्म 19 मार्च 1935 को नगर से 25 किलोमीटर की दूरी पर पांडुका ग्राम में हुआ था तथा 1993 में इस दुनिया से चल बसे। ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी उन्होंने साहित्यिक रचनाओं पर खूब छलांग लगाई और पढ़े लिखे कवियों को इन्होंने टक्कर दी तथा कभी समाज में अपना नाम दर्ज करा कर पांडुका जैसे ग्रामीण अंचल का नाम प्रसिद्ध किया। वरिष्ठ साहित्यकार परदेशी राम वर्मा ने भूमिका के माध्यम से बताया है कि झखमार के रचनाओं में अंधविश्वास के साथ ही ग्रामीण परिवेश का विशेष जिक्र हुआ है। कवि पुरुषोत्तम चक्रधारी ने बताया कि उस समय लेखन कौशल को आगे बढ़ाने के लिए कोई उपयुक्त सुविधाएं नहीं थी फिर भी इन्होंने अपनी लेखनी को जारी रख कर यह बता दिया की प्रतिभा सुविधाओं का मोहताज नहीं है। साहित्यकार तुकाराम कंसारी ने बताया कि झखमार का जीवन संघर्षों से भरा पड़ा हुआ है। उनके द्वारा लिखित कविताएं आज भी जनमानस में अमिट छाप छोड़ रही है। लेखक संतोष कुमार सोनकर मंडल ने बताया कि साहित्य समाज का दर्पण होता है देशकाल वातावरण परिस्थिति के अनुसार रचनाकार अपना कलम चलाते हैं और समाज को दिशा प्रदान करते हैं। इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को झखमार की रचनाएं पढ़ने को मिलेगी इसके लिए हिंदी साहित्य भारती बधाई के पात्र है। इस मौके पर उपस्थित अतिथि एवं कवि साहित्यकारों ने झखमार के सुरता पुस्तक की भूरी भूरी प्रशंसा की। इस मौके पर प्रमुख रूप से बिहारी लाल साहू, डॉ अनिल भतपहरी, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ. पीसी लाल यादव, डॉ. सरला शर्मा, डॉ. अरुण निगम, दुर्गा प्रसाद पारकर, सुखदेव राम साहू, जितेंद्र सुकुमार साहिर, संतोष सेन, टीकमचंद सेन सहित अनेक लोग उपस्थित थे।