कवि कविता के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को करते हैं दूर।

कवि कविता के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को करते हैं दूर।

नगर की कवित्री सरोज कंसारी को प्रयाग साहित्य समिति ने किया सम्मानित।

एकांत विला में प्रयाग साहित्य समिति की मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न।

राजिम 25 मार्च। साहित्य समाज का दर्पण है वह अपनी लेखनी से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करते हैं। उनके द्वारा रचित एक एक पंक्ति समाज के लिए अनमोल धरोहर है। उक्त बातें नगर के एकांत विला में स्थानीय प्रयाग साहित्य समिति द्वारा आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्रधानपाठक श्रीमती दुलारी देवांगन ने कही। उन्होंने आगे कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि साहित्यकारों के साथ मुझे बैठने का सुवसर मिला। कहा गया है जैसी संगत वैसी रंगत।साहित्यकारों के साथ संगत जीवन को ऊंचाइयां प्रदान करती है। इस मौके पर नगर के कवियत्री सरोज कंसारी को समिति द्वारा अंगवस्त्र, कलम, श्रीफल के साथ ही साहित्यिक पुस्तक मुक्तक एक और सूरज भेंट कर सम्मान किया गया। उल्लेखनीय है कि सरोज कंसारी गत दिनों उत्कृष्ट कविता लेखन के लिए देश की राजधानी नई दिल्ली में सम्मानित हुई है। यह सम्मान उसे राजिम अंचल के नाम रोशन करने के लिए प्रदान किया गया। काव्य गोष्ठी का संचालन करते हुए कवि संतोष कुमार सोनकर मंडल ने चुटकुले व हास्य कविता के माध्यम माहौल बनाया तथा अपने पुराने दिनों को याद कर उन्होंने कहा कि रचना लिखने के लिए लगन बहुत जरूरी है। सन 2000 के दशक में खूब कविता, कहानी एवं आलेख लिखें। उन्हें प्रकाशित कराने के लिए पत्रिकाओं में अक्सर भेज दिया करता था छपने पर मुझे विश्वास होता था कि सही मायने में यह कविता है। कई बार तो रचनाएं वापस आ जाती थी। फिर भी मुझे खेद नहीं होता था और मैं उसे दूसरी पत्रिकाओं में भेज देता था। समय के साथ साथ लगातार देश भर की पत्र-पत्रिकाओं में छपने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है। साहित्यकार उम्र दराज होते हैं तो उनकी रचनाएं यौवन को प्राप्त करती है।व्यंग्यकार संतोष सेन ने मोटिवेशन पर शानदार रचना पड़ी पंक्ति देखिए- हर किसी की किस्मत खास नहीं होती, मिलती है सफलता संघर्ष करने पर, इसलिए की मंजिल हमेशा पास नहीं होती। कवि टीकमचंद सेन ने नारायणपुर में हुए नक्सली हमले पर शहीदों की शहादत में पंक्ति पढ़कर देशभक्ति का जज्बा पैदा किया पंक्ति है-शहीदों की शहादत को सजदा सलाम करता हूं, करे जो बात मोहब्बत की उसे मैं कलाम कहता हूं। कोरोनावायरस के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर ने उम्दा शेर‌ कहा कि कैसी अंधी उड़ान है प्यारे, तेरी मुश्किल में जान है प्यारे, वायरस से ये धरती काॅंप रही, रो रहा आसमान है प्यारे ने खूब तालिया बटोरी आभार प्रकट जितेंद्र साहू ने किया।