मणिपुर में जारी हिंसा के विरोध में सर्व आदिवासी समाज जिला एमसीबी ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।

सुरेन्द्र मिनोचा
एमसीबी :- मणिपुर में जारी हिंसा पर विरोध प्रकट करते हुए सर्व आदिवासी समाज ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। कलेक्टर को सौंपे अपने ज्ञापन में सर्व आदिवासी समाज ने उल्लेख किया है कि भारतवर्ष के मणिपुर राज्य जहाँ छठवीं अनुसूची लागू है उक्त राज्य में विगत तीन माह से जारी हिंसा में सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 150 से ज्यादा नृशंस हत्याएँ 3000 से अधिक घायल हुए हैं।अभी भी हिंसा जारी है।
लगभग 60,000 से अधिक लोग अपने घर छोड़कर शरणार्थी शिविरों में रहने हेतु मजबूर हुए हैं, जबकि धरातल पर इनकी संख्या और अधिक हो सकती है।गत दिवस 4 मई को दो आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने एवं सामूहिक बलात्कार की घटना सोशल मीडिया के माध्यम से 77 दिनों बाद सामने आई है।यह घटना हृदय विदारक और इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना है।ऐसी अमानवीय घटना हमारी बहन-बेटियों के साथ सम्पूर्ण नारी जगत के लिए अपमानजनक एवं शर्मसार करने वाली घटना है।ऐसी घटना ऐसे कार्यकाल में घट रही है जबकि हमारे देश की राष्ट्रपति स्वयं आदिवासी महिला हैं एवं मणिपुर की राज्यपाल भी आदिवासी महिला है।संविधान में मणिपुर छठवीं अनुसूची राज्य घोषित क्षेत्र होने के कारण राष्ट्रपति व राज्यपाल द्वारा संवैधानिक अधिकार का उपयोग नहीं किया जा रहा है।इससे स्पष्ट है कि राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पर सीधे तौर पर सरकारों का दबाव बना हुआ है।वर्तमान प्रधान मंत्री व गृह मंत्री मणिपुर की अमानवीय घटना को रोकने में नाकाम सिद्ध हुए हैं।ऐसा प्रतीत होता है कि यह पूरी घटना सोची-समझी साजिश के तहत जनजाति समुदाय को खत्म करने का षड्यंत्र है।वर्तमान में पूरे देश में जनजाति समुदाय के साथ अन्याय एवं अत्याचार चरम सीमा तक पहुँच गया है,चाहे मध्यप्रदेश में आदिवासी के ऊपर पेशाब करने की घटना हो या छत्तीसगढ़ में मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी आदिवासी को जेसीबी मशीन से रातभर बांधकर मारने का प्रयास करने का हो इत्यादि अमानवीय अत्याचार किया जा रहा है, किन्तु केन्द्र व राज्य सरकारें इन्हें रोकने में असफल सिद्ध हो रही हैं।उपरोक्त बातों को मद्देनजर रखते हुए सर्व आदिवासी समाज ने महामहीम राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि छठवीं अनुसूची में प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए मणिपुर सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया जाए तथा राज्यपाल से भी पद अनुरूप कर्तव्यों का निर्वहन न करने के कारण उनसे त्याग पत्र लिया जाए।