
*हरेली तिहार*
सौंधी सौंधी खुश्बू महके ,
खेत,खार फुलवारी जी,
पहलीं तिहार हरेली आगे,
गौरव शाली चिन्हारी जी।।
हरियर जइसे लुगरा पहिरे,
मोर छत्तीसगढ़ महतारी हे,
तइसन लागे धान के हमरे,
सोनहा जस हरियाली हे।।
नागर जोड़ा रापा कुदारी,
हुम् धूप अब सुलगा गे जी,
चीला गुलगुल भजिया चढ़गे,
धान बोनी बुता सिरा गे जी।।
झूम उठ गे लइका सियान,
गेड़ी फुगड़ी मा सब बइहा गे जी,
शहर मा देखो मनखे मन सब
तीज तिहार ला भुला गे जी।।
छत्तीसगढ़ के गवाँई गांव में चीला चढ़ा के देवी देवता ला गोहरावत हे,
दउड़त भागत शीतला दाई संघ ठाकुर देवा मन सकलावत हे।।
गांव गवाँई के जिनगी “सरग” छाइय्या भुइय्या के हम मान बढाबो जी,
खेत खार बर आशीष मांगो तबे हम सब दुनिया के भूख मिटाबो जी।।
आगे पावन हरेली तिहार खेत खार मा हुम् धूप चीला चढ़ा लो जी,
महतारी के लुगरा हरियर सब जुर मिल लहर-लहर ‘लहरा’ लो जी।।
जुर मिल के हरेली तिहार “जम्मो छत्तीसगढ़दिया मन मना लो जी”।
रचना कार
हरीश साहू
(इंजीनियर एवं अधिवक्ता)
निवास ग्राम सेम्हरतरा राजिम जिला (गरियाबंद)
