देख हरेली आगे,,,,

देख हरेली आगे,,,,
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देख हरेली ह आगे,
अनपुरना हरियागे|
भाग भुइंया के जागे,
देख हरेली ह आगे||

सावन महिना म करिया बादर,
उमड़-घुमड़ जब बरसत हे|
चंदा संग मिले बर चकवा के,
जइसन मन म तरसत हे||
सुग्घर प्रेम रंग छागे,,, हो,, ओ,, हो,,
देख हरेली ह आगे—-

खेत, खार, तरिया, नरवा म,
पानी ह छलछलाए हे|
हरियर हरियर रुख राई म,
जइसे जवानी छाए हे||
तन मन मोरो बौरागे,, हो,, ओ,, हो,,
देख हरेली ह आगे—

रोपा, बियासी के बुता थिरागे,
नाँगर ह घर म ठाढ़े हे|
गैती,कुदारी,रापा,टंगीया ह,
वोकर तीर म माढ़े हे||
पूजा के फूल ल पागे,, हो,, ओ,, हो,,
देख हरेली ह आगे—

फूल फुलवारी बड़ निक लागे,
सावन के लगे झूला हे|
बोल बम,बोल बम,सुन के देखो,
नाचन लागे भोला हे||
देवता दरस करे आगे,, हो,, ओ,, हो,,
देख हरेली ह आगे–
रचनाकार:-श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
शिक्षक/साहित्यकार, राजिम, गरियाबंद