रोका छेका अभियान से फसल एवं पशुधन होंगे सुरक्षित।

सुकमा :- खरीफ फसलों के बुआई पूर्व खुले में विचरण करने वाले पशुओं से फसलों की रक्षा करना कृषकों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में खरीफ फसलों को बढ़ावा देने छत्तीसगढ़ शासन व्दारा प्रदेश में रोका छेका अभियान की शुरूआत कर पशुओं के चरने से कृषकों को फसलो के हानि से बचाने उक्त अभियान कारगर साबित हो रहा है।

अपितु शासन के इस प्रथा से किसान न सिर्फ खेती किसानी कार्य शीघ्र संपादित कर पायेंगे बल्कि दोहरे फसल का लाभ भी ले सकते है। पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक, डॉ. एस. जहीरूद्दीन ने बताया कि कलेक्टर हरिस.एस एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुकमा डी. एन. कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में ग्राम स्तर पर परंपरा अनुरूप रोका-छेका अभियान के तहत विभागीय कर्मचारियों के व्दारा फसल को चराई से बचाने हेतु पशुओं को गौठान में नियमित रूप से लाये जाने के संबंध में प्रत्येक गौठान ग्राम में रोका छेका अभियान अंतर्गत मुनादी करायी जा रही है। गौठान ग्राम एवं गौठानों में पशु चिकित्सा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं एवं चरवाहों को खेती में फसल की चराई को बचाने हेतु पशुओं को खुला ना छोड़कर अपने घरों, बाड़े में बांधकर या गौठान में नियमित रूप से ला कर रखने के संबंध में जागरूक किया जा रहा है तथा पशु स्वास्थ्य, पशु नस्ल सुधार हेतु बधियाकरण एवं कृत्रिम गर्भाधान तथा पशु टीकाकरण कार्य संपादित की जा रही है। गौठानों में पशुओं के प्रबंधन एवं रख-रखाव की उचित व्यवस्था हेतु गौठान प्रबंधन समिति की बैठक की जा रही है, पशुधन के बेहतर प्रबंधन व रखरखाव हेतु गौठान प्रबंधन समितियां उचित व्यवस्था करने लगी है। समस्त निर्मित गौठानों में चारागाह की स्थापना कर चारा उत्पादन कराया जा रहा है। पशुओं के रोका छेका का काम गांव-गांव में गौठान बनने से आसान हो गया है। रोका छेका अभियान के अंतर्गत जिले में अब तक 61 बैठक एवं शिविर आयोजित कर 564 पशु उपचार 5337 टीकाकरण, 638 औषधि वितरण, 6 कृत्रिम गर्भाधान 18 बधियाकरण, 2113 डिवर्मिंग एवं 12 पैरा यूरिया उपचार कराया गया है। समय-समय पर पशु चिकित्सा टीम के व्दारा गौठान ग्रामों में पशु चिकित्सा शिविर आयोजित कर पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार, पशु नस्ल सुधार हेतु बधियाकरण व कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण एवं औषधि वितरण कार्य किये जा रहे है। साथ ही बरसात के मौसम की शुरूआत से पहले और उसके दौरान जानवरों को विभिन्न आंतरिक परजीवियों के खिलाफ कृमिनाशक दवा दी रही हैं। फार्म पशुओं को संक्रामक रोग अर्थात हेमोरेजिक रोप्टीसीमिया एच.एस., ब्लैक क्वार्टर ‘बी.क्यू.’ और खुरपका और मुंहपका रोग एफ.एम.डी., के लिए वर्षा ऋतु के पूर्व ही टीका लगाया जा चुका है। बाहरी परजीवियों को नियंत्रित करने के लिए पशुशाला में कीटनाशकों का नियनित छिड़काव किया जा रहा है। पशुओं के थनों को संक्रमण से बचाने के लिए गाय के गोबर को साफ करने, पशुशाला के फर्श को स्वच्छ एवं सूखा रखने तथा मूत्र रहित रखने हेतु निर्देशित किया जा रहा है। इसके अलावा शिविर स्थल में ग्रामीणों को विभागीय आजीविका मूलक योजनाओं की जानकारी एवं पशु पालन तथा पशुओं रखरखाव हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए अधिक से अधिक ग्रामीणों को शिविर से लाभांवित होने के लिए अपील किया गया।