
राजिम :- सावन माह लगते ही पहले दिन शाम को 5:30 बजे उमड़ घूमर के साथ बरसात होने लगी और चिपचिपी गर्मी तथा उमस से लोगों ने राहत की सांस ली है। बताना जरूरी हो जाता है कि जून में 28 तारीख तक पिछले चार-पांच दिनों के लिए लगातार बारिश हुई जिसके चलते नदी का जलस्तर बढ़ गया था खेतों में पानी भर गया था। जैसे ही पानी बंद हुआ

उसके बाद किसानी कार्यों में टी तेजी आई। किसान बुवाई कार्य के लिए जुट गए थे जिसके चलते 70 से 80% मोदी का कार्य लगभग पूर्ण होने को है बचे हुए 20 से 30% आने वाले कुछ ही दिनों में कंप्लीट होने का अनुमान है। खेतों में भरा हुआ पानी इन 7 दिनों में पूरी तरह से सूख गया था किसानों को पानी का बेसब्री से इंतजार था। मंगलवार को शाम पानी गिरने से किसानों को भी राहत मिली है। ज्ञातव्य हो कि सुबह से ही सूर्यदेव अपने रौद्र रूप में दिख रहे थे जिसके चलते खूब गर्मी उमस एवं चिपचिपी पसीने से लोक तरबतर हो रहे थे। हल्के से काम करने पर ही पसीने पसीने हो रहे थे गर्मी से सभी वर्ग के लोग परेशान थे। उमस के चलते जहरीले जीव जंतु बड़ी संख्या में निकल रहे थे पानी गिरने के बाद उन्हें भी राहत मिलेगी।
सावन की पहली बारिश का बच्चों ने लिया खूब मजा
सावन के भारी बारिश के चलते बच्चे छाता लेकर गलियों में पानी का मजा लेने के लिए निकल गए। कुछ देर तो इन्होंने छाता लेकर इधर-उधर होते रहे उसके बाद तो छाता को रख दी और भीगने का मजा उठा रहे थे। उल्लेखनीय है कि इस बार सावन 59 दिनों का है। 30 अगस्त को सावन पूर्णिमा है। सामान लगते ही शिव भक्तों में खुशी छा जाती है। धर्म नगरी राजिम को हरि और हर की नगरी कहा गया है। इस लिहाज से बड़ी संख्या में शिव भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए उपस्थित होते हैं। धर्म-कर्म के कार्य प्रतिदिन होते हैं। पुरुषोत्तम मास सावन में होने के कारण शिव भक्तों में उल्लास का माहौल है।
गर्मी से स्कूली बच्चे भी हो रहे थे परेशान
छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा लगभग सभी स्कूल खोल दिए गए हैं अब एडमिशन के साथ ही पढ़ाई का कार्य शुरू हो चुका है बच्चे स्कूलों में आना-जाना कर रहे हैं तेज धूप के चलते उन्हें आने-जाने में बड़ी परेशानी हो रही थी। कपड़े पसीने से भीग रहे थे। तेज धूप के चलते बड़ी सावधानी के साथ स्कूल पहुंचने समय से पहले निकल रहे थे। शाम को वर्षा होने के कारण इन्होंने भी गुड फील किया है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि ज्यादा देर तक पानी में भीगना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है इसलिए बरसात के मौसम में भी सावधानी बरतनी जरूरी है। त्रिवेणी संगम में जलस्तर कम हो गया। आषाढ़ की पहली बारिश में ही संगम लबालब हो गया था। पानी बंद होने के बाद धीरे-धीरे करके जलस्तर बिल्कुल कम हो गया था। नतीजतन पानी से घिरा हुआ कुलेश्वर नाथ महादेव का मंदिर सूख गया है। मंदिर के आसपास पूरी नदी क्षेत्र में रेत ही रेत दिखाई दे रहे हैं। वैसे नदी में रेत एवं पानी दोनों की उपलब्धता इनके सौंदर्य को बढ़ा देती है। कुलेश्वर नाथ महादेव का मंदिर 3 नदियों के मध्य में स्थित है। बताया जाता है कि इनका स्थापना त्रेता युग में माता सीता ने अपने हाथों से बालू के द्वारा किया गया था तब से लेकर यह महादेव अभी भी अपने स्थान पर है। रामायण काल में रामचंद्र जी ने रामेश्वरम महादेव की स्थापना किया तो माता सीता ने राजिम स्थित त्रिवेणी संगम कुलेश्वर नाथ महादेव का निर्माण किया। तब से लेकर शिव भक्तों की श्रद्धा विद्यमान है।
