
राजिम :- शहर से लगे हुए गांव चौबेबांधा के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला में शाला प्रवेश उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अतिथियों द्वारा छात्र छात्राओं को गुलाल लगाकर अभिनंदन किया गया। मुंह मीठा कर कक्षा में प्रवेश कराया तथा पुस्तक प्रदान किए। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राएं पुस्तक पाकर अति उत्साहित दिख रहे थे। शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ हुई। इस मौके पर मुख्य अतिथि सरपंच दुलीचंद आंडे ने प्रतिदिन स्कूल आने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा सकारात्मक विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है शिक्षा के बिना आगे बढ़ने में अनेक रुकावटें आती है। शिक्षा के साथ-साथ संस्कार हमारे नैतिक मूल्यों को प्रगाढ़ करने का काम करती है। भारत भूमि सदियों से शिक्षा के प्रमुख केंद्र रहा है।

प्रदेश सरकार अच्छे पढ़ाई के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चला रही है। पुस्तक वितरण, गणवेश वितरण, मध्यान भोजन के अलावा सर्वसुविधा युक्त स्कूल की व्यवस्था के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार तो अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे है छात्र-छात्राओं को भी अपना पढ़ाई उत्साह के साथ करना चाहिए उन्हें पढ़कर अच्छे नंबरों से कक्षा उत्तीर्ण होने हैं। इसके लिए खूब मेहनत करें तथा आगे बढ़े। विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित उपसरपंच धनेंद्र साहू ने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को चैतन्य प्राणी बनाकर भेजा है। हंसने, रोने, बोलने, काम करने इत्यादि की कला सिर्फ मनुष्य के पास है समय का सदुपयोग करें तो आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। पढ़ाई जीवन बहुत ही महत्वपूर्ण है इसमें सिर्फ पढ़ने का ही जुनून होना चाहिए। शाला प्रबंधन समिति प्राथमिक शाला के अध्यक्ष ज्योति मांडरे, पूर्व माध्यमिक शाला के अध्यक्ष ओमबाई साहू एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा शानदार स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रधानपाठक विमला धनकर, शिक्षक बलराम साहू, ज्योति ठाकुर, विजय कुमार साहू, खिलेश्वरी ठाकुर, झूना यादव इत्यादि शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षक सदानंद साहू एवं तुकेश कुमार देवांगन ने किया। आभार प्रकट पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक टीआर धनकर ने किया। छात्रों ने कहा खूब पढ़ेंगे इस मौके पर छोटे-छोटे छात्रों ने पुस्तक पाकर गदगद दिखाई दे रहे थे। छात्रों को पूछा गया कि इस पुस्तक का क्या करोगे, तब उन्होंने कहा कि पहले तो पुस्तक को देखेंगे फिर उसके बाद पढ़ेंगे और खूब मेहनत भी करेंगे। शिक्षकों ने पूरी कालखंड अच्छे से पढ़ाने की बात कहीं। क्योंकि प्राथमिक विद्यालय छात्र छात्राओं के लिए नींव है। इसलिए इस समय पूरी सावधानी के साथ पढ़ाई में फोकस होनी चाहिए।
