वेतन समझौता में चेयरमैन का बड़ा रोल,19 फीसदी एमजीबी दिलाने की रणनीति रही कारगर l 

कोरबा :- कोयला कामगारों के 19 फीसदी एमजीबी के मसले को डीपीई के जबड़े से बाहर निकाल कर लाने का काम किया गया है, तो यह कहना गलत नहीं होगा। दरअसल 22 जून को कुछ ऐसा ही हुआ। इस काम को अंजाम देने वाले कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल हैं।दूसरी ओर यह भी कहा जा सकता है जिस काम को कोयला मंत्रालय और इसके मंत्री नहीं कर सके, उसे कर दिखाने काम  अग्रवाल ने अपने बुते किया है। जग जाहिर है कि 19 जून को 11वें वेतन समझौते को कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी द्वारा अनुमोदन किए जाने के बाद भी मंत्रालय ने इसे डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेस (डीपीई) को सौंपा दिया था। कोल इंडिया लिमिटेड के आला अफसरों, यूनियन और मीडिया के कुछेक लोगों तक यह बात पहुंची की डीपीई के मुद्दे को लेकर कोयला मंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति प्राप्त कर ली है, लेकिन कोयला मंत्रालय द्वारा 20 जून को 11 वें वेतन समझौते के एमओयू को आवश्यक कार्यवाही के लिए डीपीई को भेजे जाने के बाद स्पष्ट हुआ कि इस संदर्भ में पीएमओ से किसी प्रकार की कोई सहमति प्राप्त नहीं की गई है।इधर, जब सीआईएल चेयरमैन ने देखा कि डीपीई को पत्र लिखे जाने के बाद मामला फंस सकता है, लिहाजा उन्होंने कमर कसी और अपने कमिटमेंट को पूरा करने के लिए उन्होंने कोयला मंत्रालय में डेरा डाल लिया। 22 जून को तो वे मंत्रालय में डटे रहे और डीपीई के नियम कायदों की परवाह किए बगैर उन्होंने मंत्रालय के अफसरों को भरोसे में लिया और 11वें वेतन समझौते के इम्पलीमेंट के लिए उसी डिप्टी सेक्रेटरी दर्शन कुमार सोलंकी से पत्र सीआईएल को पत्र जारी करवा दिया, जिसने एमओयू को आवश्यक कार्यवाही के लिए डीपीई भेज दिया था। मजे की बात यह है कि 22 जून को सीआईएल चेयरमैन को जारी करवाए गए पत्र की कंडिका 4 में यह लिखा गया कि भविष्य में समय- समय पर डीपीई गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। इस पत्र की प्रतिलिपि डीपीई को भी भेजी गई।

बाक्स ज्वाइंट सेक्रेटरी ने किया किनारा

सूत्रों ने जो खबर दी इसके अनुसार कोल इंडिया लिमिटेड के मसलों को देखने वाले कोयला मंत्रालय के ज्वाइंट सेकेटरी बीपी पति ने अंतिम समय पर 11वें वेतन समझौते के मुद्दे से किनारा कर लिया। जबकि वे 19 फीसदी एमजीबी को लेकर डीपीई से लाइजिनिंग का काम कर रहे थे। बताया गया है कि जब उन्होंने देखा कि मसला डीपीई में फंसने जा रहा है, तो वे एक तरफ हो गए। ऐसी स्थिति में सीआईएल चेयरमैन ने मंत्रालय के दूसरे अफसरों के साथ मामले को आगे बढ़ाया।