क्या शिवराज सरकार में जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के सपने हो रहे साकार..?

भोपाल-अवधेश पुरोहित

भोपाल :- प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनसंख्या संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर घोषणा की कि मध्यप्रदेश में जनसंख्या संस्थाक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार किया जा रहा है? उनके इस कथन के बाद राजनीति के जानकार इस उलझन में पड़ गए कि प्रदेश में भाजपा की सरकार है या भारतीय जनसंघ की सरकार है? यह सभी जानते हैं कि नेहरु जी के मंत्रीमण्डल से त्यागपत्र देने के बाद डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी और उनका सपना था कि कश्मीर से धारा ३७० हटे और कश्मीर पर तिरंगा लहराया जाये? सही मायने में कहा जाये तो उनके इस सपने को पूरा करने का काम तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया न कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने, चौहान जिस भाजपा सरकार के प्रदेश के मुखिया हैं उस भाजपा का उदय तो जनता दल में शामिल भारतीय जनसंघ के लोगों द्वारा दोहरी सदस्यता अभियान में हुए जनता दल और भारतीय जनता पार्टी में उठापटक के बाद १९८० में भाजपा की स्थापना हुई जिस भाजपा की सरकार मध्यप्रदेश में चल रही है उसकी स्थापना दो सीटों से आज भजपा को इस मुकाम पर पहुंचाने वाले लाकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेताओं ने की थी ना कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी? जिनके सपने पूरे करने की बात मुख्यमंत्री कह रहे हैं, जिन भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. मुखर्जी के सपने को पूरा करने की बात मुख्यमंत्री कह रहे हैं यदि उन्हीं के सपनों को पूरा करने का मुख्यंमत्री के दावों को सही मान लिया जाए तो डॉ. मुखर्जी ने जब जनसंघ की स्थापना की थी तो उस समय लोगों को जोडऩे पर प्रमुखता दी जाती थी? लेकिन शिवराज सरकार में तो लोगों तो तोडऩे की मुहिम चलाई जाती है? इसी मुहिम के चलते २००३ में जिन  उमा भारती की मेहनत मशक्कत से इस प्रदेश से कांग्रेस की सरकार को सत्ता से बेदखल किया गया था? डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के समय में जिस ऐसा बर्ताव  उमा भारती के साथ न तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने और न ही उनके सहयोगियों ने ऐसा किया होगा? जिस प्रकार से उमा भारती के साथ गलत बर्ताव करके प्रदेश की सत्ता पर शिवराज सिंह चौहान काबिज हुए थे यदि वह अपनी सत्ता पर काबिज होने को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना साकार होना मान रहे हैं तो यह वही जाने? लेकिन बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये इस तरह के बयान के बाद भाजपा और प्रदेश के राजनीति पंडितों में इस बात को लेकर द्वंद्व मचा हुआ है? लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भगवान माना जाता था? मगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में तो मतदाताओं की जहरीली शराब से हुई मौत के बाद उनके मंत्रिमण्डल के सदस्य मरे का माल हजम करने की स्थिति में उसी शराब कारोबारी के बेटे से अपने १४ मतदाताओं की मौत के बाद सोने की चेन धारण करने में वह अपना गौरव महसूस करते हैं? तो वहीं प्रदेश के सहकारिता मंत्री और सीएम शिवराज के चहेते अरविंद सिंह भदौरिया जिन्होंने शिवराज सिंह के कहने पर २००८ के मतदान के समय सुश्री उमा भारती को घेरने के बाद जो स्थिति छतरपुर के बड़ामलहरा में बनी यदि उमा समर्थकों अरविंद भदौरिया के साथ जो कुछ किया वह नहीं किया होता तो उमा भारती के साथ कुछ बड़ी अनहोनी हो सकती थी ऐसा लोगों का मानना है? शायद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने लोगों के साथ इस तरह का बर्ताव किये जाने का सपना तक नहीं देखा होगा? मगर शिवराज के शासनकाल में यह सब होना आम बात है? शायद यही वजह है कि जिन जनसंघ की संस्थापकों में से एक ग्वालियर की राजमाता स्वर्गीय विजयराजे सिंधिया जिनके पास एक समय शिवराज सिंह ही उनसे मिलने और कुछ आस में घंटों खड़े रहते थे? इसी घटना का खुलासा जब प्रदेश की तत्कालीन उद्योग मंत्री यशोधरा राजे थीं तो उन्होंने इन्वेस्टर्स समिट के भागिदारी के ज्ञलिए मुख्यमंत्री के साथ विदेश का दौरा किया था और उस समय अमेरिका में उन्होंने अपने अंग्रेजी के भाषण में इस बात का खुलासा किया था कि यह वही मुख्यमंत्री हैं जो हमारी मां से भेंट करने के लिए घंटों खड़े रहते थे? यशोधरा के उद्बोधन की बात शिवराज के समझ में नहीं आई और आम लोगों की तरह तालियां बजा दी गई? लेकिन बाद में जब किसी अधिकारी ने उन्हें यह सब घटना बताई तो उन्होंने नाराज होकर यशोदरा राजे से उद्योग विभाग छीन लिया था? आज उन्हीं राजामाता विजयराजे सिंधिया की पुत्री यशोधरा राजे सिंधिया को शिवपुरी विधानसभा चुनाव से हराने के लिये मुख्यमंत्री के चहेते अरविंद सिंह भदौरिया उनके मतदाताओं को अपने विभाग के चहेते अधिकारियों की बदौलत एक के बाद एक शिवपुरी जिले के केंद्रीय सहकारिता बैंक में घोटाले करवाने में लगे हुए हैं? ताकि श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया के मतदाताओं को नाराज करने की जुगत में लगे हुए हैं? मजे की बात तो यह है कि इस कार्य में शिवपुरी जिले के जिलाधीश चौधरी भी सिंधिया के खिलाफ मतदाताओं को नाराज करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं? ऐसा क्षेत्र के सिंधिया समर्थकों का कहना है शायद यह भारतीय जनसंघ के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी के समय में अपने लोगों और मतदाताओं को नाराज करने की घटना नहीं घटी होगी? जिन डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार करने का दावा मुख्यमंंत्री शिवराज कर रहे हैं तो उन्हें डॉ. मुखर्जी ने सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि मुखर्जी के समय भी कुछ सिंहस्थों का आयोजन इस प्रदेश में हुआ होगा लेकिन उन्हीं सिंहस्थों के आयोजन में घोटाला होने की कल्पना डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने नहीं की होगी? जो शिवराज के शासनकाल में उनके मंत्रियों द्वारा २००४ और २०१६ के सिंहस्थ में भी जमकर घोटाला किया और धर्मार्थियों में भाजपा सरकार की छवि खराब करने का काम किया था? यही नहीं स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार करने का दावा मुख्यमंत्री शिवराज कर रहे हैं उन्होंने यह भी कभी नहीं सोचा होगा कि हमारी पार्टी की सरकार में विश्व में १४ ज्योर्तिलिंगों में से दो ज्योर्तिलिंग की मध्यप्रदेश में हैं उनमें से एक ज्योर्तिलिंग महाकाल के नाम पर बनाये गये महालोक के निर्माण में हुए घोटले की कल्पना न तो डॉ. मुखर्जी और न ही पीएम मोदी ने की होगी? जो मोदी आज दुनियाभर में अपनी और भारत की साख कायम करने के प्रयास में लगे हुए हैं? अभी हाल ही में अमेरिका में योग दिवस के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति और वहां के अप्रवासी भारतीयों ने जो सम्मान पीएम मोदी को दिया उनके उसी सम्मान को ठेस पहुंचाने का काम करोड़ों अप्रवासी भारतीयों को महाकाल लोक में हुए घोटाले से मोदी की छवि को भी बट्टा लगा है और अप्रवासी भारतीय यह सोचने को मजबूर हैं कि मोदी के शासनकाल में धर्म के नाम पर भाजपा की सरकार इतना भ्रष्टाचार कर सकती है? इन सब मुद्दों को लेकर प्रदेश से राजनीतिक से जुड़े आम जनता में मुख्यमंत्री के डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर अपने मुखाग्रबिन्द से कहा गया कि मप्र. में डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार किया जाता है? लोग इस बात को खोजने में लगे हुए हैं कि मप्र में जो कुछ हो रहा है उसकी कल्पना कभी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की होगी या नहीं और उसके बाद भी पीएम मोदी की साख को बट्टा लगाने में मप्र सरकार लगी हुई है? अब भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम भी मप्र की शिवराज सरकार द्वारा जोड़े जाना कहां तक उचित होगा? लोगों में इस तरह की चर्चायें चटकारे लेकर की जा रही हैं? सीएम शिवराज के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने के दावे के मायने तलाशने में लगे हुए हैं?