बरसात के पूर्व कवेलू ठीक करने में जुटे ग्रामीण।

राजिम :-  जानकारी के मुताबिक 15 जून तक छत्तीसगढ़ में मानसून आ जाता है लेकिन इस बार शायद 59 दिनों का सावन होने के कारण मानसून आने में देरी हो रही है। इसी के चलते गांव में ग्रामीण अपने घरों के छप्पर कवेलू को ठीक करने में लगे हुए हैं। बताना होगा कि प्रधानमंत्री आवास योजना पिछले 4 सालों से बंद होने के कारण आज भी लोग टूटे-फूटे छप्पर एवं कवेलू के घरों में रहने के लिए मजबूर है। इस बार अच्छी बारिश बताई जा रही है जिसके चलते अपने घरों की छत को ठीक करने में लगे हुए हैं। बताना होगा कि आज भी गांव एरिया में लगभग 40% घर छानी के ही दिख जाते हैं। इन कच्चे मकानों पर बड़ी संख्या में गांव के लोग रहते हैं यहां तक कि शहर में भी ऐसे ही स्थिति है। जोरदार बारिश होने पर पानी टपकता है रतजगा कर रात बिताते हैं। वर्तमान में खपरैल नए निर्माण नहीं हो पा रहे हैं जिसके कारण इनकी कीमत भी बढ़ी हुई है। आसानी से मिलने वाले मिट्टी के यह खपरैल अब नहीं मिल पा रहे हैं पहले शहर के गरियाबंद रोड स्थित बरेझा तालाब के पास बड़ी संख्या में कुम्हार खपरैल का निर्माण करते थे। यहां से लोगों को आसानी से कम दाम पर उपलब्ध हो जाते थे लेकिन पिछले 20 सालों से यह काम बंद कर दी गई है और अब खपरैल मिल पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। जो आदमी अपने मकान को छत का बना रहे हैं उनके पास ही खपरैल बच रहा है और उन्हीं को खरीद कर लोग अपने घर को मजबूती देने का काम कर रहे है

बंदरों ने मचाया आतंक

प्रतिदिन बंदरों का झुंड घर के छत पर इधर-उधर टालमटोल करते रहते हैं जिसके कारण खपरैल टूट कर बिखर गए हैं इससे लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मानिक राम निषाद, धनंजय साहू, देवा साहू, शिव कुमार वर्मा, महेंद्र पटेल, संतोष सोनकर ने बताया कि बंदरों के कारण हर साल खपरैल से मरम्मत करवाता हूं लेकिन अब हमारी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है इस बार टपकते हुए पानी में बरसात गुजारना पड़ेगा। वही बंदर सब्जी उत्पादक किसानों के बाड़ी में जाकर सब्जियों के पौधे को तहस-नहस कर रहे हैं जिससे लोग खासे परेशान हैं।