आत्मानंद स्कूल में फर्जी सर्टिफिकेट से 5 छात्रों के एडमिशन पर जांच शुरू l 

आरटीआई कार्यकर्ता ने लगाया आरोप जांच में सामने आएगी सच्चाई l 

राजिम :-  शासकीय राम विशाल पांडे स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल राजिम में फर्जी सर्टिफिकेट से एडमिशन करा दिए जाने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि गत सत्र 2022- 23 में 5 बच्चों का फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे आत्मानंद स्कूल राजिम में कक्षा तीसरी चौथी और छठवीं में एडमिशन करवा लिया गया। दावा किया गया है कि एक साल पढ़ने के बाद आरटीआई से निकाली गई जानकारी से इसका पता चला। इन पांचों बच्चों को आरंग के गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल ने पढ़ना बताया गया है और फर्जी अंकसूची व टीसी प्रवेश के लिए यहां उपलब्ध कराई गई है। आरटीआई कार्यकर्ता वीके बघेल ने दस्तावेजी शिकायत करते हुए फर्जीवाड़े में प्राचार्य एवं स्टाफ को भी जिम्मेदार बताया है। उल्लेखनीय है कि आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में कक्षा पहली को छोड़ अन्य सभी कक्षाओं में प्रवेश के लिए पूर्व के वर्ष अंग्रेजी माध्यम स्कूल का अंकसूची और स्थानांतरण प्रमाण पत्र होना जरूरी है।

राजिम के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम खुलने से एडमिशन के लिए लगभग होड़ सी मची हुई थी संभवत इसी होड़ के बीच अपने हिंदी मीडियम में पढ़ने वाले बच्चों को एडमिशन करवाने का फर्जीवाड़ा तरीका अपनाया। पूरे एक सत्र बच्चों ने स्कूल में अध्ययन कर लिया और अब पास होकर भी अगली कक्षा में पहुंच गए तब इसका खुलासा हुआ है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्राचार्य संजय एक्का को इसकी जानकारी थी लेकिन उसके बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसमें विद्यालय प्रशासन की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

    अन्य स्कूलों में भी फर्जीवाड़े की आशंका

बताना जरूरी हो जाता है कि गरियाबंद जिले में राजिम सहित फिंगेश्वर, छुरा, गरियाबंद, मैनपुर, देवभोग में भी शासकीय आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालित है इस तरह के मामले जिले में पहली बार आया है और स्कूल प्रशासन सहित पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। चर्चा हो रही है कि फर्जी सर्टिफिकेट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट का गोरखधंधा अन्य स्कूलों में तो नहीं किया गया है इसलिए इस मामले की जांच जरूरी हो गया है। इस संबंध में प्राचार्य संजय का नए मोबाइल पर जानकारी देते हुए बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र से एडमिशन के संबंध में जानकारी मुझे मीडिया के माध्यम से मिली है मेरे ऊपर लगाया गया आरोप निराधार है क्योंकि गत वर्ष जुलाई में प्रवेश की प्रक्रिया संपन्न हो गई थी लेकिन मेरी नियुक्ति 3 माह पश्चात अक्टूबर में हुई है उसके बाद 15 दिन का ट्रेनिंग में मुझे जाना पड़ा। अतः इस बात की जानकारी मुझे नहीं है। विद्यालय के किसी शिक्षक या कर्मचारी का इससे संबंध होने की आशंका कम ही है क्योंकि सत्य दस्तावेज प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी स्वयं विद्यार्थियों एवं पालक की है परंतु यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है यदि किसी आधार पर इसकी शिकायत हुई है तो इसकी जांच की जाएगी पश्चात दोषियों पर उचित करवाई किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि इस संबंध में निष्पक्ष जांच का आदेश दे दिया हूं। जांच उपरांत ही सही तथ्य उभरकर सामने आएगी।