शिक्षा में समानता होने पर समाज सुधरेगा पं. कन्हैया तिवारी l

नवापारा राजिम:- शहर के सोनकर पारा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचनकर्ता आचार्य पंडित कन्हैया महाराज ने कहा कि शिक्षा में समानता होने पर ही समाज में सुधार आएगा। वर्तमान में शिक्षा पद्धति अलग अलग हो गई है जिसके कारण एकरूपता का भाव नहीं दिख रहा है। उन्होंने कृष्ण जन्म आख्यान पर कहा कि भगवान का जन्म ही दुष्टों का संहार करने और समाज में भाईचारा की भावना को प्रगट करने के लिए होता है। श्रीकृष्ण के साथ में सुदामा व अन्य उनके साथीगण आश्रम में पढ़ाई किए। शिक्षा से समाज में जागृति आती है। हिंदुस्तान शिक्षा का केंद्र रहा है पहले तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय हुए हैं जहां देश विदेश के शिक्षार्थी विद्या अध्ययन के लिए आते थे। श्रीमद् भागवत कथा साक्षात मोक्ष का द्वार है

इसमें 18000 श्लोक 335 अध्याय तथा 12 स्कंध है। कलयुग से तरने के लिए ईश्वर ने भागवत रुपी कथा को धरती लोक में भेजा है। श्रीमद्भागवत महापुराण में नौ प्रकार की भक्ति बताई गई है इनमें से एक कथा सुनना है। जो धारण किया जाता है वही धर्म है। संस्कृत में कहा गया है धारयते इति धर्म:। धर्म के चार चरण है। इनमें पहला चरित्र की पवित्रता है। मनुष्य को अपने आचरण स्वच्छ रखना चाहिए। विचार कभी गलत ना रखें। सभी के प्रति अच्छा विचार रखें। इससे जीने का आनंद बढ़ जाएगा। 84 लाख योनियों में मनुष्य को श्रेष्ठ बताया गया है। आप हम सबके लिए यह श्रेष्ठ समय है अच्छे कार्य करें और जीवन को सफल बनाएं। उन्होंने कथा प्रसंग के माध्यम से कहा कि पेड़ लगाने से वातावरण स्वच्छ होता है। पर्यावरण हमारे लिए सबसे बड़ा वरदान है इन्हें सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। महाराज ने आगे कहा कि मनुष्य में 16 प्रकार के संस्कार होते हैं। इन संस्कारों पर एक एक पेड़ लगाएं तो अपने जीवन काल में 16 पेड़ लगाने का पुण्य मिलेगा। इससे हमें ताजी हवा फल फूल लकड़ी इत्यादि बहुत सारे फायदे मिलेंगे। आने वाली पीढ़ी को ऑक्सीजन खरीदना ना पड़े इसलिए जितनी ज्यादा संख्या में हो सके पौधा लगाएं क्योंकि कोरोना काल में ऑक्सीजन का महत्व सभी ने जाना है। बढ़ते हुए शहरीकरण और करते हुए पेड़ से सभी चिंतित है। चिंता करने से कुछ नहीं होगा चिंतन करें और पौधा लगाकर उनकी सुरक्षा भी करें।

इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रोता गण उपस्थित थे। राधा कृष्ण की शानदार झांकी भी दिखाई गई। छोटे-छोटे बच्चों ने राधा कृष्ण का वेष धरा जो देखते ही बन रही थी।