
राजिम :- ज्ञात हो कि 29 मई को हमारे छात्र संगठन ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय कमेटी के आव्हान पर पूरे देश मे यौन उत्पीड़न के खिलाफ संघर्षरत महिला पहलवानों के समर्थन में व लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलनरत हमारे जनसंगठनों के नेताओ, कार्यकर्ताओ और महिला पहलवानों की तानाशाही तरीके से गिरफ्तारी के विरोध में आज अखिल भारतीय काला दिवस मनाया गया। जिसके तहत पूरे देश भर में रैली धरना प्रदर्शन किया गया। हमारे जिले में भी ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन जिला कमिटी गरियाबंद द्वारा राजिम तहसील ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया गया और मांग किया गया कि 1आंदोलनरत महिला पहलवानों , जननेताओं को तुरंत रिहा करो।

2 पोस्को एक्ट के तहत आरोपी बृजभूषण शरण सिंह को तुरन्त गिरफ्तार करो। 3 लोकतांत्रिक आंदोलन को दमन करना बंद करो। 4 महिला पहलवानों को न्याय दो ।5 महिलाओ व बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करो। आप जानते ही है कि पिछले माह भर से चैंपियन पहलवानों द्वारा यौन शोषण की खिलाफ जंतर मंतर में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जा रहा है और पोस्को एक्ट के तहत आरोपी बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। आप जानते ही है कि कल दिनाँक 28 मई जहां एक ओर “नई संसद से कुछ ही मीटर की दूरी पर देश के प्रधानमंत्री “लोकतंत्र के मंदिर” के रूप में अनावरण कर रहे हैं वही दूसरी ओर लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला किया गया और केंद्र सरकार की शह पर दिल्ली पुलिस द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारो की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई गई। कल जंतर मंतर पर “महिला सम्मान महापंचायत” का आयोजन आन्दोलनकारी पहलवानों के समर्थन में किया जाना था। इस प्रदर्शन में कई जानी-मानी हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ता व विभिन्न संगठनों के नेतागणों को शामिल होना था। लेकिन, लोकतांत्रिक अधिकारों का घोर उल्लंघन करते हुए दिल्ली पुलिस ने कई लोगों को महापंचायत में जाने से रोकने के लिए सुबह से ही गिरफ्तार किया, अपने घर में ही नजरबंद किया। इसमें हमारे बिरादराना महिला और किसान संगठन ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन (AIMSS), ऑल इंडिया किसान खेतमज़दूर संगठन (AIKKMS) के कई नेतागण भी शामिल है। बाद में, जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते हुए सैकड़ो की संख्या में प्रदर्शनकारीयों को गिरफ्तार किया गया। इसमें बड़ी संख्या में ए.आई.डी.एस.ओ. के कार्यकर्ता भी शामिल है, और अभी तक सभी को रिहा नही किया गया है।यह गिरफ्तारियां हर एक नागरिक के अन्याय के खिलाफ प्रतिवाद करने के मूलभूत अधिकार पर एक फासीवादी तानाशाही हमला है, और वो भी उस दिन जब देश की नई संसद का उद्घाटन खूब धूमधाम के साथ हो रहा है। यह बहुत ही चिन्ता की बात है कि केन्द्र सरकार अपने सांसद को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, जबकि उस पर यौन उत्पीड़न के गम्भीर आरोप है और वह पोस्को एक्ट का दोषी है। हमारा संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों पर इस हमले की जोरदार ढंग से निन्दा करती है और पहलवानों के आंदोलन से जुड़े हुए सभी नेताओं की तुरन्त रिहाई की माँग करती है। साथ ही साथ हर वह नागरिक जो महिलाओं व बच्चियों की सुरक्षा चाहता है, जो चाहते है कि इन पहलवान बेटियों को न्याय मिले उनसे अपील है कि इस आंदोलन के समर्थन में आगे आये। हर मोहल्ला -गांव गांव में पहलवानों के आंदोलन के समर्थन में व लोकतांत्रिक अधिकारों को बचाने के लिए एकजुट होकर जोरदार ताकतवर आंदोलन गठित करें।
