भोपाल-अवधेश पुरोहित

भोपाल :- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबसे देश की कमान संभाली है तबसे लेकर आज तक वह एक बार नहीं अनेकों बार अपने श्रीमुख से यह कह चुके हैं कि ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा, लेकिन मध्यप्रदेश में उन्हीं की सरकार के सत्ता के मुखिया ने उनके इस नारे के मायने को बदलकर यह कर दिया कि खूब खाओ और हमे भी खिलाओ, उसी नीति से मध्यप्रदेश में सरकार चल रही है, जिसका जीता जागता उदाहरण लोक निर्माण विभाग के भ्रष्ट अधिकारी राणा के खिलाफ लोकायुक्त ने कार्रवाई करने की जब उनसे मंजूरी मांगी तो उन्होंने मना कर दिया, जबकि लोकायुक्त सूत्रों का दावा है कि यह राणा के द्वारा भ्रष्ट की गई आकूत संपत्ति से बड़ा अजीबोगरीब मामला है यदि जांच की जाए तो उसका पूरा परिवार ही फंसेगा लेकिन मुख्यमंत्री की नीति के चलते उसको क्लीन चिट दे दी गई है? भ्रष्ट अधिकारी को भ्रष्टाचार से मुक्त करने और उसकी कथनी करनी को उजागर करने का यह दूसरा मामला है जबकि लोक निर्माण विभाग में उनके सीएम हाउस में पदस्थ एक अधिकारी द्वारा सीएम हाउस में एक छोटी सी एनेक्सी बनाने के लिए साढ़े छह करोड़ का इस्टीमेट दिया था जिसे देखकर वह अचंभित हो गए थे लेकिन भ्रष्टाचार की नीतियों के चलते उसे भी सीएम ने माफ कर दिया था जिससे भ्रष्टाचारियों के हौंसले बुलंद हैं मुख्यमंत्री की खाओ और खाने दो की नीति की बदौलत अकेले लोक निर्माण विभाग ईनएनसी से लेकर भ्रष्टाचारियों की लाइन लगी हुई है जिस पर तमाम जांच एजेंसियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि उसके ही ईएनसी अपने पुत्र को विभाग का ठेका देकर उसे उपकृत करने में लगे हुए हैं मगर मुख्यमंत्री की कार्यशैली के चलते इस विभाग में सबकुछ माफ है, जहां तक भ्रष्टाचार की बात करें तो राज्य में कर्मचारी ही नहीं उनके तमाम कर्मचारियों की कार्यशैली अजब-गजब है जिसे मप्र में देखने को मिलता है कि वह अपने ही मतदाताओं की जहरीली शराब पीने से हुई मृत्यु पर शोक जताने की बजाए जहरीली शराब कारोबारी के पुत्र से सोने की चेन भेंट में मंत्री ले लेते हैं यह अजब- गजब खेल भी शिवराज सरकार की कार्यशैली के चलते मिलता है उनके ही इशारे पर बुंदेलखंड के सागर में भूपेंद्र सिंह को उन्होंने इतनी छूट दे रखी है कि वह अपने ही दल के लोगों को तो परेशान कर ही रहे हैं तो वहीं उनकी इसी कार्यशैली के चलते सागर जिले के सैंकड़ों लोग फर्जी मामलों में जेल में बंद हैं, जिनके कारण भाजपा के प्रति लोगों में असंतोष व्याप्त है? शिवराज की भजकलदारम की कार्यशैली के चलते इस प्रदेश में कोरोना काल में जमकर खेल हुआ बल्कि हमीदिया जैसे बड़े शासकीय अस्पताल से रेमडिसीवर इंजेक्शन की चोरी हो गई थी और वह इंजेक्शन मंत्री के इशारे पर राजधानी के पांच नम्बर क्षेत्र में धड़ल्ले से बिक रहे थे जिसका खुलासा एक मीडियाकर्मी ने अपनी मां को उपचार के दौरान इसे खरीदने के लिये मजबूर होना पड़ा था? ऐसे एक नहीं अनेकों मामले हैं? इसी भ्रष्टाचार की शिवराज की कार्यशैली के चलते राज्य में बच्चों के प्रवेश स्कूलों में नहीं होते हां, यह जरूर है कि आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने के लिए प्रोत्साहन भी इसी शिवराज के कार्यकाल में देखने को मिल रहा है? अब जिन आदिवासियों को सीएम ही नहीं बल्कि भाजपा संगठन भी रिझाने के भरसक प्रयास में लगा हुआ है उन्हीं आदिवासियों की सुध उस समय शिवराज मंत्रीमण्डल के मंत्री विश्वास सारंग ने नहीं ली थी जब वह झाबुआ व अलीराजपुर जिले के प्रभारी मंत्री थे उस समय जब उन्होंने झाबुआ के सर्किट हाउस में भाजपा पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी उसस बैठक में भाजपा पदाधिकारियों ने शराब माफियाओं के दबाव में पुलिस द्वारा फर्जी मामलों में फंसाकर तमाम पंच व सरपंचों को जेेल में बंद होने की बात कही थी तब मंत्री विश्वास सारंग ने उन आदिवासियों की सुध नहीं ली बल्कि अवैध शराब कारोबारियों द्वारा प्रतिवर्ष जो ३०० करोड़ की रिश्वत बांटी जाती है उन आदिवासियों की सुध तक नहीं ली थी? ऐसे एक नहीं अनेकों मामले हैं जिनमें शिवराज की कार्यशैली पर एक इतिहास लिखा जा सकता है जिसमें इनके कार्यकाल के दौरान हुए तमाम भ्रष्टाचार को स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जा सकता है जिसे भाजपा के नेता और शिवराज के गुर्गे इस शिवराज के कार्यकाल को स्वर्णिम कार्यकाल बताने में नहीं थकते हैं उसी स्वर्णिम शिवराज के कार्यकाल में जमकर भ्रष्टाचार का सिलसिला जारी है जिसे रोकने में शिवराज सरकार तो नाकाम रही भाजपा भी अपनी साख बचाने में लगी हुई है, यदि यही स्थिति रही तो आगामी विधानसभा चुनाव में अबकी बार २०० पार का सपना फिर से चकनाचूर होता दिखाई दे रहा है?
