
आडम्बर म —-
——-///—–///—–///—-
कतको मंदिर के दरशन कर ले,
चाहे घुम ले तेहा चारों धाम|
मुक्ति तोला मिले नहीं संगी,
जब तक हिरदे म नइ हे राम||
कतको बेल पान,नरियर चढ़ा ले,
तोला दरसन नइ देवे भगवान|
घर के दाई-ददा ल छोड़ के,
काबर खोजय पथरा म भगवान||
कतको भटक ले मथुरा काशी,
चाहे नहा ले सरयू अऊ गंगा|
भगवान ह खुश नइ होवे बाबू,
जब तक तोर मन नइ हे चंगा||
कतको चुनरी चढ़ा ले मंदिर म,
चाहे लगाले छप्पन भोग पकवान|
दाई-ददा के आत्मा ल कलपाबे,
त कइसे आशीष देहि भगवान||
अपन बर करे करू-करू,
दूसर बर निकाले दूध भात|
सरग म थोरको जगा नइ मिले,
तै नरक म जाबे खावत लात||
मानव हरस त मान ले,
अऊ अपन ताकत पहिचान ले|
आडंबर म कुछु नइ मिले,
तेहा बस अतकी ल जान ले||
रचनाकार:-श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
शिक्षक/साहित्यकार, राजिम, गरियाबंद
