छह पूड़ी अचार और २०० रुपये में शिवराज सरकार, भाजपा की लोकप्रियता साथ में भीड़ जुटाने वालों को मिलती है भ्रष्टाचार की गारंटी?

भोपाल-अवधेश पुरोहित

भोपाल :- मध्यप्रदेश में २० साल के भाजपा शासनकाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की कार्यशैली से जो दुर्गति हुई जिसके चलते २०१८ में तो भाजपा को करारी हार का सामना तो करना ही पड़ा था अब शिवराज की नीतियों के चलते कांग्रेस में नहीं बल्कि भाजपा में बवाल मचा हुआ है शिवराज सरकार और भाजपा के नेता अपने कार्यक्रमों में भारी भरकम भीड़ देखकर बड़े ही गदगद और प्रफुल्लित होते हैं मगर उसके पीछे शिवराज सरकार की वह नीति है वह भी अजब गजब है २००३ का समय इस मप्र में नहीं रहा जब भाजपा के नेता अपनी जेब से खर्च करके अपने नेताओं का भाषण सुनने आते थे अब मोदी के बहुचर्चित नारे सबका विकास सबके साथ का जो इस प्रदेश में चर्चित हुआ है उसके चलते अब अधिकारी यह कहने लगे हैं कि सबको विकास सबके साथ और माल झपटो अपने हाथ यही वजह है कि अब नेताओं की सभाओं में जो भीड़ जुटाई जाती है उसके लिये कोटवार से लेकर कलेक्टर तक को भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है यह भीड़ अधिकारियों द्वारा छह पूड़ी अचार और २०० रुपये की लालच में यह भीड़ सरकार द्वारा बसों में भरकर भेजी जाती है अभी हाल ही में रीवा जिले में हुए मुख्यमंत्री कई महीने पहले एक कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिये जिन बसों का उपयोग किया गया था उन बसों के मालिकों ने कलेक्टर के सामने अपने भुगतान के लिए गुहार लगाई थी कलेक्टर भी इतना भारी भरकम राशि का भुगतान न होने को लेकर आश्चर्यचकित हो गई और उन्होंने भी शिवराज सरकार की कार्यशैली के अनुसार उन बस मालिकों को शीघ्र भुगतान कराने का आश्वास देकर चलता किया, सवाल यह उठता है कि जब मुख्यमंत्री के हुए काय्रक्रमों में भीड़ जुटाने के लिये बस मालिकों के अभी तक का करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं हुआ तो अभी हाल ही में भाजपा की स्थिति को परखने के लिये केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जबलपुर, रीवा में उनका प्रवास हुआ इसके लिये शिवराज सरकार की लोकप्रियता दिखाने के लिये काफी भीड़ इकी की गई होगी उसका कितना बिल होगा यह तो आने वाला भविष्य बतायेगा लेकिन यह जरूर है कि नेताओं के इस तरह के कार्यक्रमों के समय भाजपा नेताओं की स्थिति यह हो जाती है कि जैसे कि वह अपने बच्चे की शादी के लिये लोगों को आमंत्रित कर रहे हों और इसके लिये वह अधिकारियों को फोन करते हैं कि हमें १०० लोगों को भोपाल ले जाना है इतनी राशि चाहिये अधिकारी उस भाजपा नेता की इस तरह की बात सुनकर हड़बड़ा जाता है और वह यह कहने को मजबूर हो जाता है कि हमारे पास इतनी रकम की व्यवस्था नहीं है यह स्थिति तो बड़े नेताओं व अधिकारियों के बीच की है तो छोटे-छोटे अधिकारियों की क्या स्थिति होती होगी उनसे भाजपा का गमछा डालकर कितना चंदा वसूलते होंगे इस तरह से अपनी सरकार की और भाजपा द्वारा इस प्रका की भीड़ जुटाकर शिवराज सरकार व भाजपा की लोकप्रियता दर्शाने के लिये आखिर यह कार्यक्रम कहीं न कहीं से इस मप्र के विकास को रोकने का काम करता ही है तो वहीं जो अधिकारी भीड़ जुटाने के लिये मदद करते हैं उन्हें प्रदेश के विकास में बे्रक लगाकर भ्रष्टाचार करने का यह मौका भी यह सरकार प्रदान करती है शायद यही वजह है कि इस प्रदेश में चाहे केंद्र की हों या प्रदेश की अधिकांश योजनायें सिर्फ कागजों में ही नजर आ रही हैं इसका आभास मुख्यमंत्री को भी हो चुका है और वह कई बार कह चुके हैं कि अधिकारी जो हमें बताते हैं वह जमीन पर दिखाई ही नहीं देता मगर यह कहने के पहले मुख्यमंत्री यह नहीं सोचते की जो नेताओं की आमसभाओं में भीड़ जुटाने के लिये छह पूड़ी अचार और २०० रुपये देने का काम यह अधिकारी करते हैं तो क्या वह अपनी पत्नी के जेवर बेचकर करते होंगे या कर्ज लेकर वह तो वसूल सरकारी योजनाओं में डाका डालकर ही करेंगे इस प्रकार से भीड़ जुटाकर भाजपा और शिवराज सरकार की लोकप्रियता का बखान हमारे भाजपा के नेता करते दिखाई देते हैं साथ ही इस प्रदेश के विकास में भी अवरोध पैदा करने काम भी करते हैं?