
राजिम :- विश्व हास्य दिवस के अवसर पर शहर के हास्य कवियों ने अपनी बात बेबाक रखें। उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा कि हंसने वाले कभी स्वर्ग नहीं जाते हैं वह जहां भी रहते हैं स्वर्ग वहीं चले आते हैं। हास्य व्यंग्य कवि हास्य काशीपुरी कुंदन ने कहा कि जो मुश्किलों में भी हंसते काम करते हैं वह ईश्वर की पूजा करते हैं और जो हंसाता है उसके लिए ईश्वर दुआ करता है। कवि संतोष कुमार सोनकर मंडल ने कहा कि वर्तमान में आदमी बहुत व्यस्त हो गया है।

उनके पास हंसने के लिए भी समय नहीं है। परिणामत: समय से पहले बुढ़ापा देखने को मिल रहा है। हंसने से सौ बीमारी के इलाज ऐसे ही हो जाते हैं। खुलकर हंसने से ब्लड सरकुलेशन अच्छा रहता है इम्यून सिस्टम मजबूत होता है शरीर के मेलाटोनिन नाम का हारमोंस ज्यादा बनता है। ऐसे ही अनेक फायदे हैं। जो लोग समय निकालकर कविताएं सुनते हैं और उनमें से हास्य कविताएं तो गुदगुदी भर देते हैं। वर्तमान समय में कवि सम्मेलन मंच हास्य का मंच बन गया है। जब तक हास्य का डोज ना मिले रंगत देखने को नहीं मिलती। समय निकालकर ऐसे आयोजन होना चाहिए जिससे ना सिर्फ परिवार के लोग बल्कि पूरे मोहल्ले, गांव और शहर के लोग हंसे। चुटकुलेकार गोकुल सेन ने बताया कि कविता एवं चुटकुले को सुबह-सुबह बोलकर मैं खूब हंसा। बाद में पता चला कि आज विश्व हास्य दिवस है। हंसने से सारे दुख दर्द समाप्त हो जाते हैं और शरीर में ताजगी आ जाती है। हंसने की कला ईश्वर ने सिर्फ इंसान को दी है आपने देखा होगा जानवर कभी हंस नहीं सकते। उनके आंखों से आंसू निकलते हैं। हास्य व्यंग्यकार संतोष सेन ने कहा कि कवि सम्मेलन के मंच पर चुटकुले का अतिक्रमण होता जा रहा है और लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं। मेरा मानना है व्यंग्य के माध्यम से बड़ी से बड़ी बात अत्यंत सहज भाव से व्यक्त किया जा सकता है और इसमें हंसी के फुहारे भी आते हैं। हास्य कलाकार कमलेश कौशिक ने कहा कि हमारे शब्दों को सुनकर दर्शक हंसते हैं तो हमें प्रसन्नता होती है। उन्होंने विश्व हास्य दिवस का इतिहास बताते हुए कहा कि सबसे पहले 10 मई 1998 को मुंबई में विश्व हास्य दिवस की शुरुआत हंसी योग आंदोलन के संस्थापक डॉ. मदन कटारिया ने की थी तब से हर साल मई के पहले रविवार को वर्ल्ड लाफ्टर डे के रूप में मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य लोगों में हंसी के माध्यम से भाईचारे को बढ़ावा देना है।
