रिपोर्टर संतोष सोनकर

राजिम :- नवीन मेला मैदान का काम धीमा ही सही पर प्रगति कुछ तो दिखाई दे रही है। कृष्णा कुंज में लगाए गए पौधे अब 5 फीट से भी ऊंचे हो गए हैं। उनके सामने ही मैदान पर सैकड़ों ट्रक मुरूम डाली जा रही है। जिसे राजस्थानी ट्रैक्टर से समतल किया जा रहा है। उनके ही ऊपर खेत पर बने मेड को अभी तक समतल नहीं किए गए हैं यह बड़ी चिंता की कारण है। जबकि मंत्री से लेकर संतरी तक लेवलिंग का कार्य 15 दिवस में करने की बात पिछले 2 सालों से हो रही थी और अभी भी जस का तस दिखाई दे रहा है।

नदी के किनारे तटबंध के पास 15 से 20 फीट तक गड्ढे है इन्हें पाटने में ही लंबा समय लगेगा। सड़के बननी है। पेवर ब्लॉक लगाई जानी है। साधु संतों के लिए कुटिया बनना है। मुक्ताकाशी महोत्सव मंच बनाया जाना है। संत समागम स्थल जैसे ढेरों काम है। प्रदेश के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने इस वर्ष माघी पुन्नी मेला में मंच पर बात सार्वजनिक किए हैं कि आने वाला वर्ष में नवीन मेला मैदान पर मेला लगेगा। यदि यही स्थिति रही तो अगले वर्ष भी लगना मुश्किल हो सकता है। मंत्री जी ने अपने उद्बोधन के दौरान 100 करोड़ से भी ज्यादा का बजट बताया था और इस बार विधानसभा के बजट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजिम माघी पुन्नी मेला के लिए करीब 30 करोड़ राशि का प्रावधान किया है। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन ने अभी तक कहां पर क्या बनना है इनका नक्शा सार्वजनिक नहीं किया है। यहां तक कि मीडिया को भी इनकी जानकारी नहीं है जिसके कारण आम जनता तक सही बातें नहीं पहुंच पा रही हैं जिसके कारण ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। लोग अपने हिसाब से कहां पर क्या बनना है और यहां पर यह बनना है करके रोज चर्चा हो रही है।
सड़क के उस पार नापने से ग्रामवासी चिंतित-यह बात बताना जरूरी है कि पिछले दिनों राजस्व विभाग के द्वारा बड़ी संख्या में नाप जोक हो रही थी इस दौरान सड़क के उस पार जहां पर बस्ती है उसे भी नापा गया। इसे देखकर गांव वालों ने नापने वाले अधिकारियों से पूछा तो उन्होंने बताया कि ऊपर का आदेश है हम कुछ नहीं बता सकते। परंतु इधर ग्रामीण परेशान होते हुए दिख रहे हैं। क्योंकि एक घर को बनाने में आदमी अपनी पूरी पूंजी लगा देते हैं और कहीं धोखे से भी प्रशासन ने इन्हें अपनी जद में ले लिया तो गांव वाले कहीं के नहीं रहेंगे। उन्हें चिंता हो रही है। यहां के लोगों ने कहा है कि रोड के इस पर किसी को परेशान ना करें। प्रशासन अपने सारे काम रोड के उस पार करें। लेकिन कहां पर क्या बनना है यह सही जानकारी देने वाला कोई नहीं है। प्रशासन इस बात को सार्वजनिक नहीं कर रही है और गुपचुप तरीके से नाप जोक से ग्रामवासी सकते में हैं। जानकारी के मुताबिक भाजपा शासनकाल में नवीन मेला मैदान के लिए 25 एकड़ भूमि की बात हो रही थी। कांग्रेस शासनकाल में बढ़कर 54 एकड़ हो गया। और अब तो इससे भी ज्यादा जमीन आरक्षित करने की खबर चल रही है। हालांकि प्रशासन अपना काम कर रहे हैं लेकिन गरीब गांव वाले नाप जोक से परेशान हैं इन्हें पूरी जानकारी मिलनी जरूरी हो जाती है।
