डिलिस्टिंग महारैली संवैधानिक न्याय के लिए एक आंदोलन है, बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें – डॉ देवेंद्र माहला।

बालोद /हाशिम कुरैशी

दल्ली राजहरा:- जनजाति सुरक्षा मंच छत्तीसगढ़ प्रदेश द्वारा डीलिस्टिंग महारैली का आयोजन 16 अप्रैल रविवार को रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर के सामने मैदान में किया गया है। जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा अपने गठन से ही लगातार जनजाति समाज के जो लोग अपने जातिगत रीति रिवाज, परंपरा, मत, विश्वास का त्याग करके धर्म परिवर्तन कर चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने की मांग की जा रही है। इस विषय पर अखिल भारतीय हल्बी हल्बा आदिवासी समाज 36 गढ़ केंद्रीय महासभा के अध्यक्ष डॉ देवेंद्र माहला ने कहा कि राजधानी रायपुर की महारैली में बस्तर व दुर्ग संभाग सहित राज्य के कोने कोने से हजारों की संख्या में जनजाति समाज के लोग सम्मिलित होने वाले हैं। बहुत ही जल्द यह मांग बिल का रूप ले लेगी। देश के कई राज्यों की राजधानी में यह महारैली हो चुकी है। 16 अप्रैल को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी यह महारैली होने जा रही है। इसमें पूरे छत्तीसगढ़ से हजारों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग शामिल होकर डीलिस्टिंग कानून की मांग करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यह संवैधानिक न्याय के लिए आंदोलन है, जो अन्याय अनुसूचित जनजाति समाज के साथ 70 साल से हो रहा है उसे खत्म करने के लिए जनजाति सुरक्षा मंच पूरे देश में बड़ा आंदोलन कर रहा है। पिछले वर्ष राज्य के कुछ जिलों में जिला स्तरीय डीलिस्टिंग महारैली के आयोजन के पश्चात गांव-गांव में जागरण हुआ था, प्रदेश स्तरीय इस रैली को लेकर बहुत ही उत्साह है और सभी गांव से बड़ी संख्या में जनजाति समाज के लोग सम्मिलित होंगे। वहीं डिलिस्टिंग को लेकर जानकारों का कहना है भले ही राजनीतिक दल और आदिवासियों के मत डिलिस्टिंग को लेकर एक ना हो, लेकिन हकीकत यही है कि धर्म परिवर्तन तेजी से हो रहा है। धर्म परिवर्तन को रोकने लिए डिलिस्टिंग जरुरी है। क्योंकि पैसों और संसाधनों की लालच में आदिवासी अपनी मिट्टी से अलग हो रहा है। इसलिए ऐसे धर्मांतरण करने वाले आदिवासियों को पहचान कर, उन्हें अलग श्रेणी में करना बेहद जरुरी है। ताकि जिन्हें जरुरत है उन्हें आरक्षण सुविधा का लाभ मिल सके।