विजया एकादशी पर राजीवलोचन ने धरा मनमोहनी रूप
राजिम। विजया एकादशी पर भगवान विष्णु का स्वरूप श्री राजीवलोचन मनमोहनी रूप धरा है। प्रतिमा को फुलों की माला से शानदार सजाया गया था। राजीवलोचन पर भृगुलता के चिन्ह दिखाई पड़ रहे थे। उनके मन को भाने वाले रूप की हर कोई एक झलक पाना चाह रहे थे। एकादशी पर राजीवलोचन मंदिर में देखते ही देखते भीड़ बढ़ गई। एकादशी महत्तम के अनुसार रामचंद्र ने लंका जाने के लिए सेतु का निर्माण किया तथा रावण से युद्ध करने के लिए अपने सैनिकों को मोटिवेट किया। कार्यो की सिद्धी के लिए उन्होंने विजया एकादशी व्रत किया। बताया जाता है कि यह व्रत अत्यंत फलदायी है। यहाॅ भगवान विष्णु के अलग-अलग मंदिर बने हुए है जिसमें प्रमुख रूप से मुख्म मंदिर के चारों कोण में वराह भगवान, बद्रीनारायण, नरसिंह अवतार, वामनावतार के साथ ही दक्षिण दिशा की ओर मुख किये हुए विष्णु का विराट स्वरूप का दर्शन होता है। द्वितीय परिसर में सूर्य नारायण की प्रतिमा पाॅच फिट ऊॅची है तथा दिवाल पर ही हुबहु राजीवलोचन के स्वरूप जैसे आकृति में विष्णु की प्रतिमा राजिम तेलिन मंदिर के सामने पूर्वी दिवाल पर स्थापित है। मंदिरों के समुह से अलग लक्ष्मीनारायण का मंदिर मौजूद है बताया जाता है कि यह मंदिर 100 साल पुरानी है।
