राजिम महोत्सव कलाकारों को मंच देकर उनके कला को निखारने का प्रयास कर रही है
सफलता के लिए शाॅर्टकट नहीं बल्कि फुल टाइम का सहारा ले:- सुनील तिवारी
रंगझांझर के कलाकार सुनील तिवारी ने पत्रकारों के सवालों का बेबाक् जवाब दिया
राजिम। महानदी संगम के तट पर परंपरा और संस्कृति सद्यः प्रवाहमान है। इतिहास गवाह है लोककला संस्कृति को उभारने का काम किया है। यह प्रदेश की पहचान है कर्मा, ददरिया, सुआ, राउत नाचा, पंथी गीत, पंडवानी, नाचा पर्व त्योहार व अन्य अवसर पर उभरकर सामने आते है। राजिम महोत्सव न सिर्फ कलाकारों को मंच दे रही है बल्कि उनके कला को निखारने का भागीरथी प्रयास है उक्त बातें माघी पुन्नी मेला में पहुंचे रंगझांझर के कलाकार सुनील तिवारी ने व्यक्त किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ का रंग मंच पर उतार दिया। उन्हें मीडिया सेंटर में गुलदस्ता भंेट कर सम्मान किया गया। उन्होंने चर्चा करते हुए बताया कि राजिम मंच की अपनी अलग गरिमा है, पिछले दो सालों से कलाकारों के मान-सम्मान बढ़े है। नवोदित कलाकारों के लिए कहा कि मेहनत करें परिणाम जरूर मिलेगा। सफलता के लिए पाट्टाईम नहीं बल्कि फुल टाईम रियाज जरूरी है। वैश्विक स्तर पर कलाकार छत्तीसगढ़ की लोककला को ज्यादा से ज्यादा यू-ट्यूब के साथ ही सोशल मीडिया में ज्यादा से ज्यादा वायरल करें जिससे प्रदेश ही नही पुरी दुनिया रूबरू हो। श्री तिवारी ने आगे बताया कि माता जी रामायण में भजन गाती थी, उन्हें सुनकर मैं गीतों पर स्वर देना शुरू किया। नाचा के ज्यादा शौकिन था। रात-रात भर नाच देखता था। उस समय मेरे नाना मुझे ले जाने के लिए आते थे। स्कूली जीवन से ही मंचों मे प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। सन् 1998 में ग्रुप चलाना शुरू कर दिया। जय बम्लेश्वरी मैया, तुलसी चैरा, संगवारी मे प्लेबैक सिंगिंग किया। माटी के लाल मेरी पहली फिल्म रही। दिल्ली, मुम्बई, बैंगलोर सहित देश भर में लगातार प्रस्तुति देने अवसर मिला रहा है। प्रस्तुत हमर छत्तीसगढ़ में संस्कृति की झलक है इसे पीसी लाल यादव ने लिखा है इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति का दीग्दर्शन होता है। दिल्ली में पंथी कलाकार वल्र्ड कला फेस्टिवल के साथ ही 23 हजार लोगों द्वारा एक साथ कर्मा नृत्य किया गया। जिसमें मुझे कोरियोग्राफर का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पायलट बनने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन मेरी जरूरत लोक कला को थी। इसलिए इनके सेवा करने में दर्शकों का जो प्यार मिलता है वह मेरी सबसे बड़ी पूॅजी है। उन्होंनेे बताया कि लाॅकडाउन ने सीख दिया है प्रकृति से छेड़छाड़ करना ठीक नहीं है। यह हमें देने का काम करती है इनका दुरूपयोग नहीं बल्कि सदुपयोग करें। कोरोना काल में 20 गीत तैयार किया हूॅ जिनमें 13 गानें की रिकार्ड हो गई है बाकि की तैयारी है। उन्होंने उनमें से एक गीत को गाकर सुनाया जिनमे महानदी की महिमा का बखान किया गया है। पंक्ति ‘‘मैं महानदी के पानी मा तर जाहू न जीहंव छत्तीसगढ़ मा इंहचे मन जाहू न’’। श्री तिवारी ने एक प्रश्न के जवाब में बताया कि आने वाला समय कलाकारों के लिए प्रतियोगिता से भरा हुआ है खूब मेहनत करें तभी कंधा से कंधा मिलाकर आगे बढ़ पायेंगे।
