किरंदुल / रणवीर सिंह चौहान

किरंदुल :-बैलाडीला की पहाड़ियों से लोहे के पत्थरों का उत्खनन कर अरबों रुपए का लाभ हर वर्ष अर्जित करने वाली। उक्त कम्पनी अपने कर्मचारियों के साथ क्या व्यवहार करती है यह तो एनएमडीसी के कर्मचारी वा कर्मचारियों की यूनियन ही जाने किन्तु बैलाडीला की जनता के साथ कम्पनी का व्यवहार ईस्ट इंडिया कम्पनी की तर्ज पर ही है, स्थिति यह है की बैलाडीला के एकमात्र बाजार जहां क्षेत्र के। लगभग 25,000 लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आश्रित रहते हैं एवम क्षेत्र के लगभग 5,000 आदिवासी अपनी उपज उक्त बाजार में विक्रय कर अपनी आजीविका चलाते हैं उक्त बाजार की जर्जर स्थिति से कोई अनभिज्ञ नही है।
बाजार में न तो रोड का पता है, न नाली का बारिश के दौरान आधा बाजार पानी वा कीचड़ की भेंट चढ़ जाता है बाजार आने वाली महिलाओं के। लिए एक शौचालय तक का निर्माण विगत 75 वर्षो से परियोजना नहीं करा सकी है ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हजारों आदिवासियो के पीने के पानी के लिए भी एक साधारण नल तक की व्यवस्था यह नवरत्न अरबपति कम्पनी दुर्भाग्य से नही करा सकी है यहां तक की बैलाडीला के एक व्यापारी व व्यवसाई धर्मवीर गोयल ने अपने खर्च पर एक कॉमर्शियल वाटर कूलर कीमत 60,000 लाकर एनएमडीसी से निवेदन किया था की केवल एक कनेक्शन इसमें कर दे ताकि यहां आने वाले हजारों लोगों को शीतल जल मिल सके बावजूद इसके इस कंपनी की इतनी निकृष्ठ वा संकुचित विचारधारा है की इन पाइप कनेक्शन देने से मना कर दिया गया उक्त मामले में यहां की श्रमिक संघों को भी कई बार संज्ञान लेने हेतु अनुनय विनय की गई किंतु परिणाम वही, ढाक के तीन पात, परिक्षेत्रीय विकास निधि के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपए देने वाली उक्त कंपनी के पास अपना एक अस्पताल तो है बहुत से काबिल चिकित्सक भी हैं किंतु अरबपति गरीब कंपनी के पास आज चिकित्सा के लिए आधुनिक मशीनें नहीं न तो यहां एम आर आई मशीन है न सीटी स्कैन न ही सोनोग्राफी की सुविधा और बाकी आधुनिक मशीनों वा सुविधाओं की बात तो दरकिनार ही कर दीजिए कई बार इन सब सुविधाओं के आभाव में लोगों को जबरन स्वर्गवासी बना दिया गया है कंपनी तो बस 75 वर्षो से अधिक से अधिक धन अर्जन पर ही केंद्रित है कई जगह तो हालात इतने खतरनाक हो चुके हैं की बड़े बड़े गड्डे फिसलन भरे रास्ते वा आयरन ओर का कीचड़ वा उस पर दौड़ते ट्रक, भारी भरकम मशीन यहां की जनता के लिए साक्षात यमराज के दर्शन के समतुल्य है यह है नवरत्न कम्पनी क्षेंत्र के विकास के लिए है या जनता के विनाश के लिए समझ से परे है।
