छुरा-राजिम :- जल संसाधन विभाग के द्वारा छुरा विकाखंड के ग्राम पंचायत मेड़कीडबरी से लगे झरझरा नाले में करोड़ों की लागत से एनीकट का निर्माण किया गया था। जिससे किसानों को सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके।
लेकिन अभी गर्मी के दिनों में वहां थोड़ा भी पानी का भराव नहीं है और दो साल बाद ही कई जगह उखड़ने वा टूटने लगी है दरारें पड़ रही है। बावजूद करोड़ों खर्च कर नहर नाली का निर्माण कराया जा रहा है। नहर की खुदाई तो बड़े आकार में किया जा रहा है लेकिन एनीकट का गेट की साईज देखें तो चुहे के बिल जैसा छेद दिखाई पड़ता है और उसमें सिंचाई के लिए कितना पानी जायेगा ये सोचनीय है।
प्रशासन के करोड़ों खर्च का क्या औचित्य है और क्या उपयोग होना चाहिये ये इंजीनियर तय करता है लेकिन इसका निर्माण व संचालन में इंजीनियर इसे बनाने में क्या तकनीक के हिसाब से बनाया गया है ये एक गंभीर और सोचनीय विषय है। और इसका सिंचाई का लाभ कितने गांवों के किसानों को मिलेगा यह स्थिति को देखते हुए कुछ कह पाना मुश्किल प्रतीत होता है। एक प्रकार से कहें तो प्रशासनिक पैसे का दुरुपयोग से कम नहीं लगता।
जिले के जिम्मेदार आला अधिकारियों को ऐसे कार्यों के मानिटरिंग में विशेष ध्यान रखना चाहिए, दैनिक अजय उजाला के टीम जब जिले के कलेक्टर महोदय व इससे संबंधित छुरा सिंचाई विभाग के एसडीओ पंच भावे या फिर अन्य अधिकारियों को फोन करते हैं तो अधिकारी फोन उठाना उचित नहीं समझते गरियाबंद जिला से प्रकाशित सप्ताहिक समाचार पत्र खबर गंगा सिंचाई विभाग के बारे में ऐसे कई समाचार प्रकाशित कर चुके हैं वह दैनिक अजय उजाला भी प्रकाशित कर चुके हैं इसके बावजूद भी जिले के जिम्मेदार अधिकारी किसानों के प्रति कुछ नहीं सोचते जो किसानों के हितेषी वह किसानों के हित में बात करते हैं। एक तरफ प्रदेश सरकार किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित कर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की बात कहते हैं तो उन्हीं के अधिकारी कर्मचारी उनके योजनाओं पर पलिता लगाने में तुले नजर आते हैं। इसी क्रम में सिंचाई से संबंधित साधन हेतु विन्द्रानवागढ़ क्षेत्र के किसान सिकासार जलाशय से पानी की मांग को लेकर आवाज उठाते रहे हैं और कुछ दिनों पूर्व क्षेत्रीय सांसद चुन्नीलाल साहू व बीजेपी कार्यकर्ताओं के द्वारा भी पदयात्रा किया गया था लेकिन सरकार व प्रशासन के द्वारा किसानों के सिंचाई लिए बनाए जा रहे सुविधाओं के साधनों को उन्हीं के विभागीय जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी बंटाधार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं जिसमें प्रशासनिक अंकुश जरूरी है।
