सुरेन्द्र मिनोचा
मनेन्द्रगढ़:- श्रीमद्भागवत पर आधारित आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन राजस्थान भवन में आरंभ हुआ,3 दिनों तक चलने वाले इस सत्संग का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित जन समूह को सम्बोधित करते हुये विनया स्वरूपा माता जी तत्व प्रवचन कर्ता चेन्नई मद्रास का स्वागत राजस्थान भवन एवं आंनद आश्रम सतसंग समिति के सदस्यों ने किया।उपस्थित जनों को सम्बोधित करते हुये माताजी ने दैनिक जीवन में अध्यात्मिकता विषय पर बोलते हुये कहा कि हम अपने जीवन में आध्यात्मिकता का समावेश कैसे करें,भगवान श्री कृष्ण ने जब अर्जुन को गीता का उपदेश दिया तो वे युद्ध लड़ने को तैयार हो गये।भगवत गीता भगवान द्वारा गाया हुआ गीत है। जैसे हनुमान जी को उनकी माता अंजनी के नाम पर आँजनेय कहा जाता है। कुंती के पुत्रों को भी उनकी माँ के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में हम अपनी जड़ से हटते जा रहें हैं। कुछ भी नहीं बदला, सिर्फ हमारे विचार बदले हैं। ऐसे में भागवत गीता हमारे लिए एक समाधान है।मूल रूप में कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ है। हम उसको किस भाव, किस रूप में परोसते हैं यह मुख्य बात है।धार्मिक आयोजन में सुरेश दवे,श्याम सुंदर पोद्दार,रामचरित द्विवेदी,डा. ऋषभ दवे,अधि. आशीष सिंह, पंकज गोयल, जयंती यादव, मनोज कक्कड, गोविन्द अग्रवाल, हिम्मत लाल चावड़ा,ज्ञान चंद्र वैश्य, श्रीमती विशाखा दवे,ज्योत्स्ना शेजपाल,प्रीति चावड़ा, भारती चावड़ा, गुंजन चावड़ा,ममता सोनी, रुक्मणि खोबरागढ़े, राखी सिंह,कांति भाई समेत क्षेत्र के गणमान्य जन मौजूद रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन समिति के चंद्रकांत चावड़ा ने किया।
