
राजिम :- पंडित श्यामाचरण शुक्ला चौक में चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवे दिन प्रवचनकर्ता बहन नंदनी किशोरी माखन चोरी प्रसंग पर कहा कि कृष्ण का माखन चुराना असल में सखियों एवं सखाओं का चित्त चुराना था। उन्होंने माखन के माध्यम से दुख को समाप्त कर दिया और जीवन को खुशियों से भर दिया। नंदनी किशोरी ने 56 भोग का रहस्य बताते हुए कहा कि पुरवासी इंद्र की पूजा के लिए चंदा इकट्ठा करते थे और अपनी गाड़ी कमाई के सारे पदार्थ उनको समर्पित करते थे इन्हें देख कर कृष्ण ने कहा कि इंद्र की पूजा बंद करो और गोवर्धन की पूजा चालू करो।
उनका कहना मान कर ऐसा ही किया। इससे इंद्र रुष्ट हो गया और भयंकर वर्षा करा दी। पूरा नगर डूबने लगा जब कृष्ण ने अपनी तर्जनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर नगर की रक्षा की। उन्होंने 7 दिन तक पर्वत को उठा रखा। श्री कृष्ण दिन में 8 बार भोजन करते थे। दोनों को मिला दिया जाए तो सात अट्ठे 56 होता है। इसलिए गोवर्धन पर्वत पर छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है। उन्होंने बकासुर प्रसंग पर बताया कि जब पांडव और कुंती एकचक्र में रह रहे थे, उन्हीं दिनों बकासुर नाम का एक नरभक्षी राक्षस उस नगर के पास आकर रह रहा था। उसने इस नगर का विनाश करना शुरू कर दिया था।
शहर के अंदर उन्होंने यह व्यवस्था किया कि हर सप्ताह एक परिवार गाड़ी भरकर भोजन पकाएगा और उसे दो बैल तथा अपने परिवार का एक सदस्य भेजना होगा। वह लोगों, पशुओं और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को उठा लेता और खा जाता था। फिर नगर परिषद ने उससे एक समझौता किया कि वह सप्ताह में एक बार उसे गाड़ी भरकर भोजन, दो बैल और एक आदमी भेजेंगे। बदले में वह नरभक्षी नगर पर आक्रमण नहीं करेगा और बाकी लोगों को छोड़ देगा। मगर बकासुर की क्षुधा तृप्त नहीं होती थी। भीम ने खुद वहां जाने की इच्छा प्रकट की। एक भयंकर लड़ाई में उसने बकासुर को हराकर मार डाला। बाद में बकासुर की बहन हिडंबा से उनकी शादी हुई। कथा के दौरान माखन चोरी का दृश्य दिखाया गया नन्हे नन्हे बच्चों ने कृष्ण का स्वरूप धारण कर खूब माखन लूटा। इस दौरान प्रमुख रूप से दीना वर्मा, गायत्री वर्मा, बोधसत्व वर्मा, हेमा वर्मा, चंद्रहास साहू, सोहन वर्मा, ताराचंद तारक, खिलेंद्र दिल्लीवार, चुनेश्वरी दिल्लीवार, दुर्गा देवांगन, मीरा यादव सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थे।
