आर्सेलर मित्तल के आतंक से गुस्साए ग्रामीणों ने फूंका आंदोलन का बिगुल।

किरंदुल/रणवीर सिंह चौहान

किरंदुल :- विगत दिनों से खबर प्रकाशित की जा रही है की आर्सेलर मित्तल की जो कार्यप्रणाली है वह यहाँ के आदिवासी व आम जनता के जन जीवन को खतरे में डाल रही है। कभी भी इनका गुस्सा फुट सकता है, जो अब दिखाई देने लगा है।

ग्राम कुंडेली को चुना प्रदर्शन के लिए आर्सेलर मित्तल के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा गार्बेज परिवहन एवम आदिवासियों की जमीन पर कंपनी पर बेजा कब्जा के विरोध में ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन कंपनी को दीतत्काल काम बन्द करने की चेतावनी कंपनी के वेस्ट मटेरियल से जमीन बंजर हो जाने पर जबरदस्त नाराजगी है राजनैतिक पार्टियां भी अब ग्रामीणों के समर्थन में आने लगी।

दंतेवाड़ा जिले के सुदूर अंचल बैलाडीला में स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मितल निप्पन स्टील इंडिया लिमिटेड अपने पूर्व नाम एस्सार स्टील की स्थापना के समय से ही विवादों में रहते हुए अखबारों की सुर्खियों में बने रहती है। विदित है कि दंतेवाड़ा जिले के कुंदेली गांव में विगत दो महीनों से किरंदुल नगर के समीप स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मित्तल निप्पन स्टील इंडिया लिमिटेड से निकलने वाले लाल अपशिस्ट पदार्थ को कुंदेली गांव में डंप किया जा रहा है।जिसको लेकर गांव के ग्रामीणों के द्वारा डंप किया जा रहे लाल जहर का विरोध करने के लिए राजनैतिक पार्टी सीपीआई जिला दंतेवाड़ा एवं सीपीआई समर्थित आदिवासी महासभा एवं सीपीआई की विंग अखिल भारतीय नोजवान सभा से कंपनी के खिलाफ विरोध करने की मांग रखी गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीपीआई के जिला सचिव भीमसेन एवं अखिल भारतीय नोजवान सभा के जिला अध्यक्ष एवं कटेकल्याण ब्लॉक के जनपद उपाध्यक्ष जितेंद्र सोरी ने कुंदेली गांव के आसपास के करीबन 700 ग्रामीणों के साथ मिलकर कंपनी के द्वारा डंप की जा रही लाल मिट्टी के पास बैठकर सड़क पर जमकर नारेबाजी करते कंपनी की भारी वाहनों को वापिस भेज दिया। इस संबंध में चर्चा करते हुए अखिल भारतीय नोजवान सभा के दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष जितेंद्र सोरी ने कहा कि कुंदेली गांव के ग्रामीणों के अनुरोध पर शनिवार को सीपीआई एवं अखिल भारतीय नोजवान सभा तथा सीपीआई समर्थित आदिवासी महासभा के द्वारा गांव में आर्सेलर मित्तल कंपनी के द्वारा डाले जा रहे लाल मिट्टी का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया गया।

जितेंद्र सोरी ने कहा कि फर्जी ग्राम सभा कर मिट्टी को डंप किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है। की डंप मटेरियल की वजह से हमारे आस पास की कृषि भूमि पूरी तरह बंजर हो जाएगी। हमारे फसलें बर्बाद होती है इसके वेस्ट गार्बेज मटेरियल से आस पास के बोर से निकलने वाले पानी विषैला व जहरीला न हो जाए जो हमें व हमारे बच्चों को किसी गंभीर बीमारियों का शिकार होना पड़े हम हमेशा डरे हुए होते हैं। जिस जगह पर लाल मिट्टी डाली जा रही है उस जगह के आसपास के हैंडपम्पों में भी बारिश की वजह से लाल पानी निकल रहा है। जितेंद्र ने कहा कि कंपनी के द्वारा गांव में डाली जा रही लाल मिट्टी की पूरी प्रक्रिया में कहीं ना कहीं कंपनी के समर्थन में जिला प्रशासन की भूमिका भी संदेह के दायरे में दिख रहीं हैं। ग्रामीणों ने कई बार शासन प्रशसान को ज्ञापन आवेदन के माधयम से अवगत करा चुके हैं फिर भी नील बटे सन्नाटा। और जो भूमि को ग्रामसभा से अनुमति लिए हैं वह कृषि भूमि के नाम पर लिया गया है जो पूरी तरह फर्जी है।

जो ग्रामसभा में विधिवत तरीके से नहीं लिया गया है हमारे द्वारा आवाज उठाने पर हमें धमकी दिया जाता रहा है, अब हम चुप नहीं बैठेंगे। हम प्रस्ताव रद्द कर इसे शून्य करेंगे। शासन में यह प्रावधान है, इस मुद्दे पर जीतेन्द्र सोरी का कहना है की अगर ऐसा ही रहा तो कंपनी के खिलाफ सीपीआई एवं नोजवान सभा पूरे जिले में आंदोलन चलाएगी ।