माँ कौशल्या हेतु दीवान के सपने को साकार कर रहे:- डाॅ देवदास।

राजिम :- ब्रह्मलीन संत कवि पवन दीवान छत्तीसगढ़ को श्रीराम की जननी मां कौशल्या की जन्मभूमि मानते थे। वह अपने हर प्रवचन में इसके ऐतिहासिक, पौराणिक और जनश्रुतियों के अनेक उदाहरण देते थे । इन तथ्यों को भारत के महामहिम राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत भी किए थे। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के ध्वज वाहक, स्वाभिमानी संत को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए राष्ट्रपति पुरस्कृत सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक एवं साहित्यकार डाॅ मुन्ना लाल देवदास ने कहा कि संत महात्माओं के दिखाए हुए मार्ग पर चलना और उनके सपने को साकार करने हेतु सार्थक पहल करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है ।डॉक्टर देवदास ने आगे कहा कि यह मेरे लिए संयोग और सौभाग्य की बात है कि

संत कवि पवन दीवान जी ने अपने अभियान की शुरुआत जिस विश्व प्रसिद्ध कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी रायपुर से की, उसी कौशल्या माता मंदिर से मैंने भी 5 सूत्री अभियान 2019 से प्रारंभ की । जिसमें प्रथम है-कौशल्या माता मंदिर प्रांगण में प्रतिवर्ष ऐतिहासिक पितर मानस महोत्सव का आयोजन करना। द्वितीय- कौशल्या माता की महिमा पर आधारित पुस्तक प्रकाशित करवाना, जिसमें प्रथम पुस्तक ” छत्तीसगढ़ की बेटी कौशल्या ” को छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग द्वारा प्रकाशित की गई । तृतीय – मां कौशल्या विषय बिंदु पर अखिल भारतीय निशुल्क काव्य लेखन प्रतियोगिता आयोजित करना और विजेताओं को ₹15000 पुरस्कार देना । चतुर्थ – प्रत्येक रविवार को मंदिर प्रांगण में दर्शनार्थियों के लिए रविवारीय मानस गान का आयोजन करना, और पांचवा है कौशल्या माता पर आधारित गीतों की रचना करना। इसमें प्रथम छत्तीसगढ़ी जस गीत को सुनील सोनी और विनीता धीवर ने अपनी आवाज दी। इसी प्रकार ऐतिहासिक हिंदी भजन ” कौशल्या जन्मभूमि छत्तीसगढ़ ” को विश्वविख्यात भजन सम्राट पद्म श्री अनूप जलोटा जी ने अपनी आवाज दी, जिसे टी सीरीज कंपनी मुंबई ने रिलीज करके छत्तीसगढ़ की अस्मिता को विश्व पटल पर पहुँचा दिया।‌ मुझे इन 5 सूत्रीय अभिनव पहल में आशातीत सफलता मिल रही है यह कौशल्या माता की असीम कृपा, संत पवन दीवान जी की दिव्य प्रेरणा शक्ति और छत्तीसगढ़ वासियों के आशीर्वाद का पुण्य प्रसाद है। इस अभियान को सफल बनाने में कौशल्या माता मंदिर समिति एवं समस्त नगरवासी चंदखुरी का, जिला मानस संघों का, तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़ का, भगवताचार्यों का, कवियों एवं साहित्यकारों का, लोक कलाकारों, समाजसेवियों एवं प्रबुद्ध जनों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। मैं पुनः संत कवि पवन दीवान जी को आज उनकी 9 वीं पुण्यतिथि पर सादर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए सब का हृदय से आभार व्यक्त कर रहा हूं।