राजिम :- छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एड़ी चोटी एक करने वाले संत कवि पवन दीवान ने अपने जीवन काल में प्रमुख तीन सपने संजो कर रखे थे जिन्हें उन्हें पूरा करना था इसके लिए जी तोड़ मेहनत भी किया। 1 नवंबर सन् 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आ गया और मेहनत सफल हुई। उन्होंने तीसरे सपने के लिए प्रदेश के प्रसिद्ध साहित्यकार परदेशी राम वर्मा को साथ में लेकर मां कौशल्या की भूमि चंद्रखुरी को विकसित करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। ऐसा कोई दिन नहीं रहा होगा जब वह चंद्रखुरी की बात ना की हो। उनकी दिली तमन्ना थी कि भगवान रामचंद्र के ननिहाल में मां कौशल्या की भव्य मंदिर बने तथा हर दृष्टिकोण से उन्हें विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन्हें विकसित करने के लिए करोड़ों रुपया की स्वीकृति दिलाई है और काम भी तेजी के साथ हो रहा है लेकिन उनका दूसरा सपना राजिम जिला बनाना था। ऐसा नहीं है कि सिर्फ जिला बनाना है करके चुपचाप बैठे रहे हो। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में राजिम जिला के लिए अविभाजित मध्य प्रदेश में राजधानी भोपाल से लेकर वर्तमान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गलियारों में चर्चा छेड़ी। इस दरमियान पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपने एक दिवसीय प्रवास के दौरान नवापारा राजिम पहुंचे। वहां राजिम जिला की घोषणा करने ही वाले थे कि किसी बात पर राजिम और अभनपुर के विधायकों के बीच सहमति न बन पाई। नतीजा मामला लटका जो आज तक पूर्ण नहीं हुआ है। तब उन्होंने कहा था कि जब भी नए जिले का गठन होगा राजिम शीर्ष पर होगा। देखते ही देखते 16 जिला के साथ मिला छत्तीसगढ़ राज्य में 17 और नए जिले बन गए लेकिन अभी तक राजिम का नंबर नहीं आया है यहां की जनता हर बार सरकार की ओर नजरें लगाकर मुंह ताकती रहती है। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मेला के समय महाशिवरात्रि पर समापन के दिवस आए थे उस दिन तो पूरी जनता यह मानकर चल रही थी कि मुख्यमंत्री राजिम जिला की घोषणा करेंगे। उन्होंने बात भी नहीं की नतीजा लाखों जनता निराश हुए। नवंबर दिसंबर में भेंट मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजिम पहुंचे एक रात्रि यहां विश्राम किया भगवान राजीवलोचन और कुलेश्वरनाथ महादेव का दर्शन किया। बावजूद इसके उन्होंने राजिम जिला की घोषणा नहीं की। वैसे भी आसपास जहां भी गए घोषणाएं करते रहे। राजिम की बारी आई तो सामाजिक बंधुओं को भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत कर चलते बने। इस दौरान पत्रकारों ने उन्हें पूछ लिया। क्या राजिम जिला बन पाएगा इस पर उन्होंने जवाब दिया कि जिला को खड़ा करने में समय लगता है और कम समय में हम जिला नहीं बना सकते। इनके साथ ही घोर निराशा यहां की जनता के हाथ लगी। इन तीन महीनों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 4 बार राजिम पहुंच चुके हैं। लगातार आ रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजिम प्रेम किसी से छुपी नहीं है। उन्होंने रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय संत प्रदीप मिश्रा के प्रवचन के दौरान अपने भाषण में राजिम की महिमा का गुणगान किया। प्राचीन एवं पौराणिक नगरी के महत्व को प्रतिपादित किया। मुख्यमंत्री बार-बार राजिम का ही जिक्र कर रहे हैं लेकिन जिले के मामले पर उनकी चुप्पी समझ से परे हैं। यहां की जनता तो यह कह रही है कि संत कवि पवन दीवान के अंतिम इच्छा राजिम जिला की रही है उन्हें पूरा करने पर ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह भी जानकारी मिली है कि संत कवि पवन दीवान पत्रकारों के बीच हमेशा कहा करते थे कि राजिम जिला अवश्य बनेगा बस थोड़ा इंतजार कीजिए। यहां की जनता का विकास दहलीज पर खड़ी है। इसी दौरान सन 2014 में संत कवि पवन दीवान ब्रह्मलीन हो गए और उनके जिला बनाने की सपना अधूरा रह गया है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। उन्होंने कांग्रेस की सेवा लंबे समय तक की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजिम जिला बनाकर संत कवि पवन दीवान के सपने को पूरा कर सकते हैं।

लगातार शहर की आबादी बढ़ रहीबताना होगा कि त्रिवेणी संगम प्रयाग भूमि के नाम से पूरी दुनिया में विख्यात भगवान राजीवलोचन की नगरी राजिम के दोनों पाट पर दो शहर बसा हुआ है इन्हें मिलाकर जिला का रूप दे दिया जाए तो जिले के अधिकारी यही बैठेंगे जिससे विकास को पंख लगेंगे। वर्तमान में माघी पुन्नी मेला 3 जिलों को मिलाकर लगता है यदि इस क्षेत्र को एक जिला बना दिया जाए तो प्राचीन नगरी के साथ-साथ आसपास के गांव का तेजी के साथ विकास होगा। शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार इत्यादि में बढ़ोतरी होगी। शहर की आबादी की लगातार बढ़ रही है, शहरी करण में तेजी आई है। जिस अनुसार जनसंख्या बढ़ी है उसके हिसाब से सुविधाएं नगण्य देखी जा रही है। जिला बनने पर दीवान जी के सपने पूरे तो होंगे ही साथ ही यहां के लोगों की दिनचर्या भी बदलेगी और विकास तेजी के साथ होगा।
