किरंदुल / रणवीर सिंह चौहान
किरंदुल:- आर्सेलर मित्तल के किरन्दुल स्थित प्लांट से धड़ा धड़ एक के पीछे एक निकलती दस चक्का टिप्पर लौह चूर्ण उड़ाती एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करती हुई कभी भी देखी जा सकती हैं, जो वैसे तो सम्पूर्ण शहर में भयावह दृश्य पैदा कर देती हैं किन्तु ग्रामीण स्कूली बच्चों के स्कूल आने के मुख्य मार्ग पटेल पारा की रोड पर तो तबाही ही मचा रखी है

गौरतलब है कि जहाँ एक तरफ बच्चों के ड्रेस रोजाना सफेद से लाल में परिवर्तित हो जाते हैं वहीं दूसरी तरफ आदिवादी बच्चों व ट्रकों के बीच मौत की एक बारीक रेखा भी खींची होती है अनेको बार स्थानीय नागरिकों द्वारा इन ट्रक मालिकों व कंपनी का पुरजोर विरोध भी किया किन्तु वह नक्कार खाने में तूती की आवाज ही साबित हुई चूंकि एक तरफ होती है बाहुबलियों, दलालो की ताकतवर फ़ौज जो शाम दाम दंड भेद का उपयोग करने में कुशल है व दूसरी तरफ होते हैं गरीब आदिवासी व अति गरीब राशन कार्ड धारियों के गरीब बच्चे ! ज्यादा विरोध होने पर पुलिस का भी उपयोग सुनिश्चित होता है

यह विकराल समस्या वर्षो से निर्बाध गति से चली आ रही जनता का व ट्रक मालिको और कंपनी के बीच टकराव भी वर्षो पुराना है किंतु शासन प्रशासन इस पर मौन रह कर धृतराष्ट्र की भूमिका में ही रहता है, अब जब गर्मी बढ़ने लगी है तब इन छोटे छोटे बच्चों को भी देखकर इन्हे तरस नहीं आता जो इन धूल कण शरीर के अंदर लेकर अपनी ही मौत को दावत देने के लिए यहाँ के रहवासी मजबूर हैं शायद किसी बड़ी घटना का इंतजार है उसके उपरांत ही निराकरण होगा।
