स्थानीय लोगों के ही प्रतिनिधि अपने समाज से कर रहें हैं फरेब।

किरंदुल / रणवीर सिंह चौहान

किरंदुल:- मामला आर्सेलर मित्तल के गार्बेज मटेरियल के परिवहन का-आर्सेलर मित्तल कंपनी जो कि पूर्व में एस्सार स्टील लिमिटेड के अधीन थी वह एन एम डी सी से फाइन ओर(लोह चूर्ण) क्रय कर अपने सयंत्र में ले जाकर एक विशेष प्रोसेस द्वारा कई प्रकार के रसायन मिलाकर उसे एक विशेष प्रकार की लुगदी में कन्वर्ट कर विशाखपट्नम की ओर भेज देती है उक्त प्रक्रिया के पूर्ण होने के फलस्वरूप ढेर सारा अपशिष्ट संयंत्र में इकट्ठा हो जाता है जिसकी वर्तमान मात्रा लगभग 30 लाख टन है यह सरासर एक जहरीला एवम अनूपयोगी सामग्री है जिसमे फ्लोमीन ,सोडियम सल्फेट ,हाइड्रेड लाइम ,नालको केमिकल वाटर शील्ड जैसे और भी रसायनिक सामाग्री का उपयोग किया जाता है ..अब यहीं से प्रारम्भ होती है आदिवासियों के शोषण की गाथा जिसका लब्बोलुआब यह है

कि कंपनी के धूर्त,शातिर व चालाक अधिकारी स्थानीय लोगों के समाज से कुछ आर्थिक रूप से कमजोर व स्वार्थी लोगों को खोज निकालते हैं एवं इन्हें मोटी रकम व तरह तरह के उत्कोच व प्रलोभन देकर ग्रामीणों को येन केन प्रकारेण उनकी जमीनों पर कंपनी का अपशिष्ट फेंकना चालू कर देते हैं

  जिसमें सैकड़ो ट्रकों का इस्तेमाल किया जाता है, कम्पनी के कुछ चहेते व दलाल प्रवत्ति के ठेकेदार भी कंपनी के इशारे पर दिन रात एक कर देते हैं व अपने बाहुबल और ऊंची पहुंच से आदिवासियों को डराने धमकाने में लग जाते हैं राजनीतिक पहुँच रखने वाले कद्दावर ठेकेदार इस जहर के परिवहन के खेल में पुलिस प्रशासन का भी जम कर इस्तेमाल करते है गौरतलब है कि दंतेवाड़ा घोर नक्सल प्रभावित जिला है व यहाँ आये ठेकेदार की इनसे मिलीभगत के आरोप यदा कदा लगते ही रहते हैं और ऐसा कई बार प्रमाणित भी होता आया है वर्ना क्या वजह है कि कंपनी के जिस कार्य को कोई नहीं कर पाता एक विशेष ठेकेदार उसे बड़ी सुगमता से अंजाम दे देतें है ।

शासन प्रशासन को चाहिए की ऐसे कम्पनी के दलाल प्रवित्ति के ठेकेदारों पर पैनी नजर रखकर इनके क्रियाकलापों पर अंकुश लगाया जाये ।

जिससे यहाँ की पुलिस प्रशासन व आम जनता को जान माल से हाँथ न धोना पड़ेहैजब तक ऐसे स्वार्थी लालची दुष्ट प्रवित्ति के ठेकेदार यहाँ रहेंगे यहाँ की भोली भाली जनता के लिए ये नासूर ही बने रहेंगे . इस सम्बन्ध में आर्सेलर मित्तल के अधिकारीयों से चर्चा के लिए फ़ोन लगाने पर कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला . वैसे भी ये बयान देना नहीं चाहते ।

इनकी यही हरकत कई शंकाओं को जन्म देती है सबसे गंभीर बात तो ये है कि जिन आदिवासियों की उपजाऊ भूमि पर यह मटेरिअल उर्फ जहर फेंका जा रहा है,भविष्य में उसकी जमीन के साथ साथ आसपास में सारी भूमी बंजर भूमि में परिवर्तित हो जाएगी व इसका अंजाम कितना भयावह होगा आज उसकी कल्पना नहीं कि जा सकती कंपनी जिन जहरीले रासायनों का उपयोग शोधित करने की प्रक्रिया में करती है एवम प्रक्रिया के तहत जो अपशिष्ट उत्सर्जित होता है उसमें इन रसायनों का बड़ा हिस्सा मौजूद होता है।जो पूरी तरह से जमीन को बर्बाद कर देती है .और इसकी वजह से स्थानीय लोगो को कई प्रकार की बिमारी से जूझना पड़ रहा है ज्ञात हो की विगत दिनों इस संयंत्र के उच्च रैंक के अधिकारी व ठेकेदार भी एक बार नक्सलियों से सम्बन्ध होने की वजह से जेल की हवा खा चुके हैं । उसके बाद भी ये सुधरने वालो में से नहीं है ।