बंधन
बंधन है यह प्रेम का, समझो मेरे मीत
प्यारी तेरी बोल तो,लेती मन को जीत।।
रिश्ता सातों जन्म का ,तेरा मेरा जान।
प्रियवर तेरे संग से, बढ़ती मेरी शान।।
बाबुल का घर छोड़कर ,आयी तेरे साथ।
साथ निभाना साथिया,, थामें मेरा हाथ।।
मांग भरी सिंदूर से, सदा रहे मनमीत।
चमके बिंदी माथ पर, बनी रहे ये प्रीत।।
तेरी मेरी प्रीत की, बड़ी निराली बात।
जीवन में होती रहे,खुशियां की
बरसात।।
आशा उमेश पांडेय
