चल न चल ना नोनी के बाबू ग, राजिम मेला घुमे ल जाबोन|

राजिम मेला (भाग-३)


चल न चल ना नोनी के बाबू ग,
राजिम मेला घुमे ल जाबोन|
चल न चल ना गुड्डू के दाई ओ,
राजिम मेला घुमे ल जाबोन||
बेटी बेटा के बिहाव लकठागे,
वोकर बर जोरन बिसाबोन—-
सबले पहिली हमन ह,मनिहारी दुकान जाबोन|
टिकली फुंदरी,चुरी चाकी,मनभरहा बिसाबोन||
बेटी-बहू दुनों ल न,सोनपुतरी सहीन सजाबोन-
चल न चल——–
वोकर पाछु म हमन,कोष्टा के दुकान म जाबोन|
आनी बानी के कपड़ा लत्ता,हमन ग बिसाबोन||
तेलचगहि,अऊ भाँवर के,लुगरा पाटा ले आबोन-
चल न चल——–
पटवा दुकान जाके लेबोन,आलता,सिंदूर, बंदन|
बेटा बर जी मौर लेबोन,बेटी अऊ बहू बर कंगन||
उहि संग आवत-जावत,पनही घलक बिसाबोन-
चल न चल———
सुरता राखबे वोकर पाछु,कंडरा दुकान जाना हे|
पर्रा,बिजना,झांपी,झेंझरि,सुपली घलक लाना हे||
बनिया दुकान जाके, किराना सामान लेआबोन-
चल न चल————
सुनार कर चांदी के पायल,करघन,बिछिया,लेबो|
सोनहा खिनवा,माला मुंदरि,अऊ फुल्ली ल लेबो||
बेटी -बेटा मन के जिनगी ल,हमन बने सजाबोन-
चल न चल—-
हलवाई करा जाके,करी लाडु,नाश्ता बनवाना हे|
कतको इंहा काम पड़े हे,नेवता नेवते ल जाना हे||
बैंड के चक्कर म झन रबे,गड़वा बाजा बजाबोन-
चल न चल—
रचनाकार:– श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
शिक्षक/साहित्यकार, राजिम, गरियाबंद, (छ.ग.)