आठ साल का बालक काली माता के रूप में बना आकर्षण का केंद्र।

राजिम :- छत्तीसगढ़ की धरा पर प्राचीन काल से ही आध्यात्म की गंगा बहती हैं। यह लोगो की धार्मिक आस्था का केंद्र हैं धर्म नगरी होने के कारण यहां दूर-दराज से श्रद्धालु अधिक संख्या में आते हैं और पिंडदान पूजन का कार्य मंदिर में करते हैं।प्रतिवर्ष होने वाले मेला के कारण राजिम की पहचान देश-विदेश में भी फैली हैं विदेशी सैलानी भी यहां आकर बहुत ही प्रसन्न होते हैं राजिम कुंभ के रूप में इसकी ख्याति निश्चित रूप से दूर-दूर तक फैली थी। इसमें दो मत नहीं यहां अनेकता में एकता के दर्शन होते हैं भक्ति की बयार बहती हैं आज यह पर्यटन स्थल के रूप मे प्रसिद्ध हैं लेकिन एक विडंबना देखने को यहां मिलती हैं राजनितिक रूप से विभिन्नता जिसकी सरकार होती हैं वे अपने अनुसार इसे स्वरूप देते हैं राजनीति से ऊपर उठकर अगर राजिम के विकास पर ध्यान दिया गया होता तो आज इसकी तस्वीर सपनो से भी सुंदर होता। पूर्व सरकार ने राजिम मेला को राजिम कुंभ मेला के रूप मे स्थापित कर बहुत ही सराहनीय कार्य किया था जिससे यहां की महत्ता बहुत विस्तृत हो गई थी सांस्कृतिक धार्मिक और सभी दृष्टि से जो उचित था। छत्तीसगढ़ के कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति को एक नई पहचान मिली और उन्हें राष्ट्रिय और अंतररा्ट्रीय स्तर पर भी कार्यक्रम के लिए निमंत्रण मिला जब किसी क्षेत्र की पहचान बढ़ती हैं अच्छे कार्य होते हैं तो किसी एक व्यक्ती की सराहना नहीं सभी के लिए गर्व का विषय होता हैं लेकिन राजनितिक दुराभाव के कारण राजिम कुंभ का नाम बदलकर फिर से राजिम पुन्नी मेला कर दिए उनकी सोच हैं यह मूल स्वरूप हैं लेकिन समय के अनुसार परिवर्तन प्रकृति का नियम हैं इसमें कोई दो मत नहीं की राजिम कुंभ मेला के रूप मे साधु-संतो का भव्य रूप मे आगमन से यह धरा पावन पतित होती थीं जिससे आशीर्वाद से यह क्षेत्र पल्लवित और पुष्पित हुआ सरकार कोई भी बनें अच्छे कार्य को जोड़कर रखना ही चाहीए। क्योंकि अपनी डफली अपना ढोल बजाने से विकास के मार्ग अवरूद्ध होते हैं।

राजिम माघी पुन्नी मेला में वैसे तो बहुत से आकर्षण होते हैं बहुरूपिया के वेष में लोगो का मनोरंजन कर रोजी-रोटी कमाना उद्देश्य होता हैं कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के पास प्रमुख आकर्षण का केंद्र हैं काली माता के रूप मे आठ साल का बालक जो बिलासपुर से अपने माता-पिता के साथ आया हैं और साक्षात काली माता का रूप धारण कर मेलार्थियों को अपनी ओर सहज आकर्षित कर रहा हैं सबसे अच्छी बात है बालक होकर माता का रूप धारण करना उससे जब पूछा गया आप हनुमान राम कृष्ण भी बन सकते थें लड़के होकर काली माता बनना अजीब नहीं लगता तो उसने मासूमियत से जवाब दिया मेरे माता-पिता भी यही रूप धारण करते हैं माता बनना अपने आप में सौभाग्य की बात हैं और पापी पेट के लिए तो सब करना पड़ता हैं बालक ने बताया मै पहली बार आया हूं और अभी शिवरात्रि तक काली माता बनकर यही रहूंगा यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है आखरी दिन मेला घूमकर घर जाएंगे।