माघी पुन्नी मेला में श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान

*राजिम।माघी पुन्नी के पावन अवसर पर शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया। इसी के साथ राजिम माघी पुन्नी मेला का भी शुभारंभ हो गया। जानकारी के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन भगवान श्री राजीव लोचन का जन्म दिवस है। इसके उपलक्ष्य में सदियों से राजिम के इस पावन भूमि में मेले भरते आ रहा है। भगवान का जन्मोत्सव मंदिर प्रांगण में बैंड-बाजे के साथ बहुत ही धूम-धाम से मनाया गया है। भगवान के पूजा के बाद नया लाल ध्वज मंदिर के कलश में चढ़ाया गया। माघ पूर्णिमा को लेकर भगवान श्री राजीव लोचन का मंदिर दमकने लगा है। बिजली की झालर और तेज लाइट की रोशनी से जगमगाने लगा है।
माघी पर्णिमा के शुभ अवसर पर अचंल सहित प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम पैरी सोढ़ूर और महानदी में तडके सुबह से डुबकी लगाकर अपने आप को धन्य किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ श्री राजीव लोचन और कुलेश्वरनाथ महादेव के मंदिर पहुंचकर दर्शन कर अपने परिवार की खुशहाली और सुख समृद्धि की आशीर्वाद मांगा। दोनों मंदिरों के अलावा श्रद्धालुओं ने लोमश ऋषि आश्रम, राजिम भक्तिन माता मंदिर, मामा-भांचा मंदिर, राजराजेश्वर, दानदानेश्वर, बाब गरीब नाथ महादेव के भी दर्शन किए। कई महिलाएं एवं युवतियां तीनों नदी, पैरी, सोढूर और महानदी की धार में डुबकी लगाने के बाद नदी के रेत में शिवलिंग बनाकर उसमें नारियल, बेल पत्ता, धतुरे का फूल, दूध चढ़ाकर पूजा अर्चना किया और नदी के धार में दीपदान किए। जानकारो के मुताबिक सूर्योदय के पूर्व माघी पुन्नी स्नान का बड़ा महत्व है। दीप दान किए जाने का भी धार्मिक महत्व है, इसलिए नदी की धार में दीप दान कर सीधे श्री राजीव लोचन और भगवान श्री कुलेष्वरनाथ महादेव के दर्शन के लिए लोग पहुंचते रहे।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजात
सुरक्षा की दृष्टि से पूरे मेला स्थल के पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। मंदिर में भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हैं। श्री राजीव लोचन दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को कुलेश्वर महादेव के मंदिर तक नदी की रेत में चलकर जाना पड़ेगा। इस बार मुरूम की जगह रेत की सड़क बनी है।
छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम जन आस्था का केन्द्र*

राजिम।* भारत देश में जो महत्व प्रयाग तीर्थ इलाहाबाद का है, छत्तीसगढ़ प्रदेश में वही महत्व प्रयाग तीर्थ राजिम का है। राजिम को धर्म नगरी, लोक कला संस्कृति का गढ़ कहा जाता है। राजिम में गंगा, यमुना और सरस्वती नदी की संगम की तरह पैरी, सोंढूर और महानदी का संगम स्थल त्रिवेणी है। इसी त्रिवेणी संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव का मंदिर है। इस कुलेश्वर महादेव के संबंध में यह किवंदती है कि 14वें वर्ष के वनवास काल में माता सीता जी ने संगम स्थल में स्नान कर अपने कुल देवता की नदी के रेत से विग्रह बनाकर पूजा अर्चना की थी। जिस कारण उनका नाम कुलेश्वर माना जाता है। जो हमारे छत्तीसगढ़ के लिए जन आस्था का केन्द्र है। यहां प्रतिवर्ष माघी पुन्नी मेला से शिवरात्रि तक विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। देश विदेश से साधु-संतों एवं दर्शनार्थियों का शुभागमन होता है। कुलेश्वर महादेव मंदिर से लगे हुए लोमश ऋषि का आश्रम है।
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राजिम क्षेत्र को छत्तीसगढ़ की पंचकोशी परिक्रमा के नाम से भी जाना जाता है। पंचकोशी परिक्रमा में 5 स्वायंभू शिवलिंग की लोग साधनापूर्वक यात्रा करते है। जिनमें प्रमुख श्री कुलेश्वर महादेव (राजिम), पठेश्वर महादेव (पटेवा), चम्पेश्वर महादेव (चंपारण), फणिकेश्वर महादेव (फिंगेश्वर) और कोपेश्वर महादेव कोपरा है। राजिम की पुण्य नगरी पुरातत्वों एवं प्राचीन सभ्यता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ भगवान श्री राजिव लोचन की भव्य प्रतिमा स्थापित है। राजीव लोचन का जन्मोत्सव माघी पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। जानकारी के अनुसार इस दिन उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर का पट बंद रहता है क्योकि भगवान जगन्नाथ श्री राजीव लोचन का जन्मोत्सव मनाने राजिम आते है।
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राजिम में महानदी के तट पर राजिव लोचन मंदिर परिसर से लगा सीताबाड़ी है। सीताबाड़ी में छत्तीसगढ़ शासन के पुरातत्व विभाग द्वारा उत्खन्न कार्य किया रहा है। जिसमें सम्राट अशोक के काल का विष्णु मंदिर, मौर्य कालिन अवशेष, 14वीं शताब्दी का स्वर्ण सिक्का, अनेक मूर्तियाँ और सिंधुघाटी सभ्यता से जुड़े अनेक कलाकृतियां मिल रही है।
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राजिम माघी पुन्नी मेला महोत्सव त्रिवेणी संगम स्थल में जहाँ पर आयोजित होता है। वहाँ तीन धारा की तरह तीन जिलों गरियाबंद, धमतरी और रायपुर जिला का संगम होता है। यहाँ पूरे छत्तीसगढ़ की लोक कलासंस्कृति का दर्शन होता है। गरियाबंद जिला में 32 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान उल्लेखित है।
खर्चीली शादी से बचने के लिए सामूहिक विवाह को महत्व देना जरूरी – श्री ताम्रध्वज साहू*
राजीवलोचन मंदिर प्रांगण में 28 जोड़े विवाह बंधन में बंधे
*मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने विडियों काॅन्फ्रेसिंग के जरिये दिया आशीर्वाद*

*राजिम।* भगवान श्रीराजीव लोचन मंदिर परिसर में राजिम माघी पुन्नी मेला के अवसर पर पहले दिन ही मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह सह-जनजागरूता कार्यक्रम के अंतर्गत 28 जोड़े का विवाह सम्पन्न हुआ। मंत्रोचार के साथ सात फेरे लिए गए तथा सात वचन के साथ एक-दूसरे का हाथ थामे। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप उपस्थित प्रदेश के गृह एवं जिले के प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू ने वर-वधु को बधाई देते हुए शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि आज लोग शादी समारोह में मेहनत के कमाई की मोटी रकम खर्च कर देते हैं जबकि उससे जीवकोपार्जन के लिए छोटे-मोटे व्यवसाय किया जा सकता है। खर्चीली शादी से बचने के लिए सामूहिक विवाह को महत्व देना जरूरी है। आज दिखावा ज्यादा हो गया है उससे बचे। यह पवित्र स्थल है जहाॅ वर-वधु विवाह बंधन में बंधे है आप जहाॅ भी रहे परिवार समाज एवं देश की तरक्की के लिए काम करें। इस मौके पर वीडियो काॅफ्रेसिंग के माध्यम से प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी जोड़े को विवाह बंधन में बंधने के लिए शुभकामनाएॅ दी तथा कहा कि पिछले वर्ष सामूहिक सरकार द्वारा 15 हजार रूपये दिया जाता था। हमने उसे 25 हजार कर दिया है। सात वचन जिन्दगी भर साथ निभाने के लिए लेते हैं। मैं प्रत्येक वर से एक वचन और लेना चाहता हूॅ। वह स्वास्थ्य से है आपको ध्यान रखना की आपनी पत्नी बच्चे के अलावा पूरे परिवार का स्वास्थ्य फिट रहे इसके लिए आपको विशेष ध्यान देना है। सुपोषण से पूरा परिवार के साथ ही आने वाली पीढ़ी स्वास्थ्य रहेगा। उन्होंने बताया की प्रदेश में राजिम माघी पून्नी मेला एवं कर्णेश्वर मेला आज से शुरू हुआ है और आज ही पूरे राज्य से 3500 जोड़े विवाह बंधन में बंधे है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री तथा विधायक अमितेष शुक्ल प्रत्येक जोड़ा के पास पहुंचकर नवदाम्पत्य जीवन की मंगलकामना को लेकर शुभाशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा की भगवान राजीवलोचन के प्रांगण में शादी समारोह का आयोजन अपने आप में महत्व लिये हुए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दूरगामी सोच एवं शादी के खर्चे को कम करने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह योजना प्रदेश सरकार की जागरूकता को सिद्ध करती है। उन्होंने आगे कहा की पूरा विधानसभा क्षेत्र मेरा परिवार है, परिवार का मैं सदस्य हूॅ। शादी समारोह में बाराती और घराती दोनो बनने का जो अवसर मिला है वह मेरे लिए सौभग्य की बात है। नगर पंचायत अध्यक्ष रेखा सोनकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि विवाह के बाद एक नई जीवन की शुरूआत होती है। मधुरता बनी रहे इसके लिए छोटे-छोटे बातों में भूलकर भी लड़ाई-झगड़े की स्थिति निर्मित नहीं होनी चाहिए। एक-दूसरे को समझकर आनंद पूर्वक जीवन निर्वाह करें। जनपद पंचायत फिंगेश्वर के अध्यक्ष पुष्पा जगन्नाथ साहू ने कहा कि नवयुगल नवजीवन की शुरूआत माघ-पुर्णिमा से कर रहे हैं। कन्यादान से बड़ा पूण्य और कोई नहीं है। माता-पिता कन्यादान कर रहें है। यह सबसे बड़ा दान है। समाज धीरे-धीरे बदल रहा है फिजूलखर्ची से लोग उब गए है उससे बचने के लिए लोग सामूहिक विवाह योजना महती भूमिका का निर्वाहन करती है। जिला कार्यक्रम अधिकारी जगरानी एक्का ने बताया कि सभी 28 जोड़े जिले के फिंगेश्वर, छुरा, मैनपुर, गरियाबंद, विकासखण्ड से है। इस मौके पर जिला कलेक्टर निलेश क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंद्रकात वर्मा द्वारा भी वर-वधुओं को आशीर्वाद दिया गया। उपस्थित थे। इस अवसर पर सभापति मधुबाला रात्रे, जिला पंचायत सदस्य रोहित साहू, जिला काग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भावसिंह साहू, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी साहू, विकास तिवारी, सुनील तिवारी, मनीष दूबे, रामकुमार साहू, साधु निषाद, रामनारायण साहू, कुलेश्वर साहू सहित परियोजना अधिकारी ममता जोशी, चंदूलाल साहू, चंद्रहास साहू, पर्यवेक्षक रामेश्वरी वर्मा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पंचायत इंस्पेक्टर नूतन साहू ने किया। आभार प्रकट जिलापंचायत के सी.ई.ओ. चंद्रकांत वर्मा ने किया।