बालोद। शासन प्रशासन के नाक के नीचे रौना रेत खदान में संचालक द्वारा सारे नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए दो दो चैन माउंटेन मशीन के जरिए रेत का उत्खनन किया जा रहा हैं। ठेकेदार द्वारा रॉयल्टी के नाम पर चार गुना से अधिक पैसा लेने की बाते सामने आ रही हैं, जिसके बाद भी शासन प्रशासन द्वारा अब तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नही किया जा रहा हैं जिससे प्रशासन और ठेकेदार की मिलीभगत की बु आ रही हैं, जिससे आमजनों की जेब मे 4 गुना अतिरिक्त भार पड़ रहा हैं।
रेत ठेकेदार सरकार की मंशा पर फेर रहे हैं पानी :-टेंडर प्रक्रिया द्वारा संचालित उक्त सभी रेत खदानों में संचालक द्वारा रॉयल्टी से 4 गुना अधिक पैसे लिए जा रहे हैं। रेत खदान के संचालको द्वारा भूपेश सरकार की मंशा पर पानी फेरा जा रहा हैं। क्योकि जिस मंशा से भूपेश सरकार में रेत खदानों को टेंडर प्रक्रिया के तहत चलाने का निर्णय लिया हैं। उस मंशा पर ठेकेदार पलीता लगा रहे हैं। पूर्व में जिले सहित प्रदेश भर में अवैध रूप से संचालित हो रहे रेत खदानों एवं रेत की कालाबाज़ारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से भूपेश नित सरकार ने टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की।
वाहनों से 5 हजार से 55 सौ रुपये वसूल रहे हैं ठेकेदार :- नियमानुसार कई प्रतिद्वंदीयों ने टेंडर प्रक्रिया में साझेदारी निभाई। जिस ठेकेदार की निविदा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप पाई गई उसके टेंडर को स्वीकृति दी गई तथा कार्यादेश जारी किया गया। यहां यह बताना लाजिमी हैं कि विभाग द्वारा जारी किए गए प्रत्येक रॉयल्टी बुक में 100 पन्ने होते हैं। टेंडर प्रक्रिया के तहत रॉयल्टी बुक जारी कराने के लिए 10 घन मीटर वाले प्रत्येक रॉयल्टी बुक शुल्क 50 हजार रुपये, नीलामी राशि के 54 हजार 500 रुपये, पर्यावरण शुल्क 5 हजार 625, अधोसरंचना शुल्क 5 हजार 625, डीएमएफ का 10 प्रतिशत शुल्क याने की 5 हजार रुपए तथा टीसीएस शुल्क 1 हजार रुपये ठेकेदार को खनिज विभाग में जमा कराने होते है। वही 3 घन मीटर वाले रॉयल्टी बुक जारी कराने के लिए प्रत्येक रॉयल्टी बुक के लिए शुल्क 15 हजार, नीलामी राशि 16 हजार 350, पर्यावरण शुल्क 1688 अधोसरंचना शुल्क 1688, डीएमएफ का 10 प्रतिशत शुल्क याने की 1500 रुपए तथा टीसीएस शुल्क 300 रुपये ठेकेदार को जमा कराने होते हैं। याने की 10 घन मीटर वाले 100 पन्ने की रॉयल्टी बुक जारी कराने के लिए ठेकेदार को कुल 1 लाख 21 हजार 750 रुपये और 3 घन मीटर वाले 100 पन्ने की रॉयल्टी बुक जारी कराने के लिए ठेकेदार को 36 हजार 526 रुपये खनिज विभाग में जमा कराने होते हैं। इस प्रकार 10 घन मीटर रेत के लिए 1217 रुपये एवं 3 घन मीटर रेत के लिए 365 रुपये 26 पैसे रॉयल्टी शुल्क रेत का परिवहन करने वाले वाहनों को देनी होती हैं। अगर इसमें मेंटनेंस एवं अन्य खर्च भी जोड़ते है तो ज्यादा से ज्यादा 500 रुपये अतिरिक्त ठेकेदार के द्वारा लिया जा सकता हैं। लेकिन टेंडर ठेकेदारों के द्वारा 10 घन मीटर का 5 हजार से 5500 रुपये तथा 3 घन मीटर का 2 हजार से 2500 रुपये रेत का परिवहन कर रहे वाहनों से लिए जा रहे हैं। याने की सीधे 4 गुना अधिक राशि ठेकेदारों के द्वारा वसूली जा रही हैं।
खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर उठने लगे हैं सवाल :- सारे मापदंडों की धज्जियां उड़ाते हुए टेंडर ठेकेदार के द्वारा मनमाने तरीके से रॉयल्टी से 4 गुना अधिक वसूली करने के मामले में जिला खनिज अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवालियां निशान उठने शुरू हो गए हैं। शासन-प्रशासन के आंख के नीचे वैध रेत खदान में अवैध रूप से लाखो रुपये की वसूली की जा रही हैं। यहां यह बताना लाजिमी हैं कि दुर्ग, भिलाई व बालोद के ठेकेदारों के द्वारा टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से हर्राठेमा, रौना व अरौद खदान संचालित किया जा रहा हैं। जिसमें कुछ शराब कारोबारी के भी तार जुड़े हैं। बहरहाल भूपेश नित सरकार ने जिस मंशा से टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से रेत खदानें संचालित करने का निर्णय लिया हैं, उस पर ठेकेदार पलीता लगाने में तूल गए हैं। जनमानश में यह भी चर्चा आम हैं कि पूर्व के भाजपा शासनकाल में अवैध रूप से रेत खदानें संचालित हुआ करती थी, तब भी रॉयल्टी से 4 से 5 गुना अधिक वसूली की जाती थी और अब भूपेश सरकार के समय में भी यही कार्य टेंडर प्रक्रिया की आड़ किया जा रहा हैं। वो भी प्रशासन के नाक के नीचे।
