*भाजपा सरकार की नियत जितना काला है उतनी ही काली उनका कानून है:- तेजराम विद्रोही*

*भाजपा सरकार की नियत जितना काला है उतनी ही काली उनका कानून है:- तेजराम विद्रोही*

राजिम। केन्द्र सरकार द्वारा कृषि सुधार के नाम पर लाये गए तीन कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के 88 वें दिन सिंघु बार्डर पर सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव तथा छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के उस बयान कि ‘ किसान अब तक नहीं बता पा रहे हैं कि इसमें काला क्या है ‘ पर कहा कि जब पूरी कानून ही काली है तो उसमें काला बताने बचा ही क्या है। यह भारतीय जनता पार्टी की नियत जितना काला है उतनी ही कानून काली है। क्योंकि किसान संगठनों ने अध्यादेश लाने के तुरंत बाद ही लगातार कृषि मंत्री से आग्रह किया है कि इन तीनों कृषि कानून वापस इसलिए लिया जाना जरूरी है क्योंकि ये कानून कृषि मंडियो, खेती करने की प्रक्रिया, लागत और सामान की आपूर्ति, फसलों का भंडारण, शीतगृह, परिवहन, प्रसंस्करण, खाने की बिक्री में बड़े कॉरपोरेट व विदेशी कंपनियों को कानूनी अधिकार के तौर पर स्थापित कर देगी। साथ ही साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन से खुलेआम जमाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ावा देंगे। खाने की कीमतें हर साल कम से कम डेढ़ गुणा बढ़ाने की अनुमति देंगे और राशन व्यवस्था को चौपट कर देंगे। कनून में यह भी लिखा है कि सरकार इन कंपनियों को प्रोत्साहन देगी।

विद्रोही ने कहा कि जब सभी व्यवस्थाएं निजी कॉरपोरेट हाथों में होगी तो क्या सरकार उन पर लगाम लगा पाएगी। इसे इस बात से भी समझा जा सकता है एक तो पेट्रोलियम मंत्रालय सरकार के पास है परंतु पेट्रोल डीजल की दामों को नियंत्रित करने में सरकार असफल है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की दाम कम होने पर भी भारत मे दाम बढ़ रहा है जिसका दुष्प्रभाव आवश्यक वस्तुओं की महंगाई के रूप में सामने आ रही है जिसकी बोझ व्यापक आम जनता को पड़ रही है। दूसरी बात अप्रैल 2018 में जीएसटी लागू करने के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे आर्थिक आजादी बताया था लेकिन परिणाम भारत का आर्थिक पतन के रूप में सामने है और इसका भी भार आम जनता को ही वहन करना पड़ रहा है। केन्द्र की भाजपा सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए पिछ्ली 70 साल के सरकार को दोषी ठहराते हैं जबकि इन सालों में भारतीय जनता पार्टी का कार्यकाल भी शामिल है। सच्चाई यह है कि मोदी सरकार विश्व व्यापार संगठन और विश्व बैंक के नीतियों के अधीन भारत में बैंक, बीमा, रेलवे, एयर पोर्ट जैसे सार्वजनिक संस्थाओं को निजीकरण कर अडानी अंबानी जैसे कॉरपोरेट घरानों के हवाले कर रही है। दूसरे तरफ चीन, पाकिस्तान, हिन्दू मुस्लिम, जाति सम्प्रदाय के नाम पर भारतीय जनता को बांटकर जन भावनाओं का इस्तेमाल कर अपने काले नियत वाले चेहरे को छुपाने का झूठा प्रयास कर रहा है जिसे किसान आंदोलन ने बेनकाब कर दिया है।