संसार की रक्षा के लिए महादेव ने किया विष पान- पंडित राकेश शर्मा

पाण्डुका- ग्राम सरकड़ा में ग्राम वासियो के सहयोग से 07 फरवरी से 15 फरवरी तक श्रीमद्भागवत आयोजित किया गया है,जिसमें कथावाचक पंडित राकेश शर्मा द्वारा चतुर्थ दिवस वामन अवतार एवं समुद्र मंथन के बारे में बताया। शर्मा ने बताया कि भाद्र मास के शुक्ल पक्ष कक द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी या वामन जयंती के रूप में मनाया जाता है। वामन अवतार श्री हरि विष्णु के पांचवे अवतार के रूप में माने जाते है।वामन अवतार में भगवान विष्णु बौने ब्राम्हण के रूप में ऋषि कश्यप एवं देव माता अदिति के रूप में जन्म लिया था। वामन भगवान देव राज इंद्र के छोटे भाई के रूप में जाने जाते है। जब देव दानव में युद्ध हुआ तो दैत्यराज बलि ने इंद्र आदि देवताओं को परास्त कर दिया ,जिससे दुखी होकर देव माता अदिति श्री हरि विष्णु को प्रसन्न करने एवं पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए सहस्त्रों वर्षो तक तपस्या करने लगी जिससे प्रसन्न होकर विष्णु ने वामन अर्थात बौने रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद दिया।यही वामन भगवान ने देवताओं की रक्षा के लिए राजा बलि से 3 पग भूमि दान में लिया और देवताओ की रक्षा की,और देवताओं को भय मुक्त किया।दुर्वासा ऋषि ने अपना अपमान होने के कारण देवराज इन्द्र को ‘श्री’ (लक्ष्मी) से हीन हो जाने का शाप दे दिया। भगवान विष्णु ने इंद्र को शाप मुक्ति के लिए असुरों के साथ ‘समुद्र मंथन’ के लिए कहा और दैत्यों को अमृत का लालच दिया।
देव और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया जिसमे विष्णु ने कच्छप अवतार लेकर समुद्र मंथन में विशेष सहयोग प्रदान किया।समुद्र मंथन में सर्वप्रथम हलाहल विष निकला जिसे संसार की रक्षा के लिए देवो के देव महादेव ने विष पान कर संसार की रक्षा की।इसके साथ ही 14 अन्य रत्नों की प्राप्ति हुई जिसे अन्य देवताओं ने अपने पास रखे ।
