रायपुर,आज सुबह 12 बजे राजधानी रायपुर के धरना स्थल पर एंव मैनपुर के जिडार मे छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ, आदिवासी भारत महासभा (ABM), टी यू सी आई , ए आई के के एस और सिख समुदाय के साथियों ने मिलकर किसान विरोधी तीन काले कानूनों एंव मजदूर विरोधी चार काले कानूनों को जलाया गया और रायपुर मे राजनांदगांव के बीजेपी सांसद द्वारा दिल्ली मे चल रही किसान आंदोलन को नक्सली और खालिस्तानी कहे जाने पर सांसद का पुतला फूंका गया।
ज्ञात हो की किसान विगत 50 दिनों से जन विरोधी किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली के विभिन्न सीमाओं में किसान का आंदोलन जारी है,और इस आंदोलन में अब तक 70 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं, आंदोलन के समर्थन में छत्तीसगढ़ से भी किसानों का जत्था दिल्ली के सिंघु बार्डर पर डटे है। रायपुर धरना स्थल पर कृषि कानून,मजदूर कानूनों एंव सांसद का पुतला दहन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए आदिवासी भारत महासभा के संयोजक सौरा यादव,छत्तीसगढ़ किसान मजदुर महासंघ के प्रमुख डॉ संकेत ठाकुर,अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के उपाध्यक्ष मदलाल साहू ,सिख समुदाय के साथियों ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा लाये गए कॉरपोरेट परस्त तथा किसान , कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानून को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून लागू करने की मांग को लेकर अध्यादेश लाये जाने के समय से ही विरोध जारी है।

न्यायालय ने इस बात पर कहीं भी विचार नहीं किया कि अध्यादेश के जरिए लाया गया कानून संवैधानिक है या नहीं, क्योंकि कृषि राज्य का विषय है और राज्य को पूछे बिना ही कानून बनाया गया है। सरकार से किसानों का दो ही माँग है तीनों कृषि कानून रद्द करो और न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करो लेकिन हठधर्मी केन्द्र की मोदी सरकार इसका समाधान करने में असफल साबित हुआ है।इस असफलता को ढंकने के लिए ही न्यायालय का सहारा लिया है। कानून पर रोक लगाना मोदी का नैतिक हार जरूर है, परंतु इसके पीछे का लक्ष्य किसान आंदोलन, जो जन आंदोलन का स्वरूप ले लिया है, जिसको कमजोर करना है।जिन चार लोगों की समिति का गठन किया गया है, उनकी ही मेरबानी से बीजेपी/आरएसएस क़ी मोदी सरकार यह कानून बनाया हैं। इस तरह का निर्णय से कंगारु अदालते भी बेनकाब हो गई है। क्योंकि किसानों का आंदोलन कृषि क्षेत्र के निगमीकरण के खिलाफ और खाद्य सुरक्षा की अधिकारों का रक्षा करना है, आम उपभोक्ता भी समझ चुके हैं कि यह कानून चंद पूंजीपतियों के लिए असीमित मुनाफा बटोरने के लिए सुविधा देने वाली है। मुक्त बाजार के जरिये किसानों का खेत और खेती छीनना चाहते हैं। आदिवासी भारत महासभा के पद्मलालनेताम,युवराज,सुमित्रा,शौलेनदंरी परमेसवार,गौखरन,प्रताप ,हेमलाल मरकाम छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ और सिख समुदाय की ओर से भी साथी उपस्थित रहे।
